उत्तराखंड में बैकफुट पर है कांग्रेस, जिलाध्यक्ष ने खोली शिकस्त की परतें….क्रिड़ात्मक ढंग से दिखाई कांग्रेस की वास्तविक तस्वीर

उत्तराखंड में बैकफुट पर है कांग्रेस

 

 

 

 

आगामी 2027 में राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ अगले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूती देने के लिए राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने राजधानी दिल्ली में बैठक का आयोजन किया, जिसमें बीते शुक्रवार को उत्तराखंड का नंबर आया। उत्तराखंड स्थित नैनीताल जिले से भी कांग्रेस पार्टी के मजबूत करने के लिए सुझाव दिए गए। इन्ही सुझावों के बीच में हमेशा जीतते-जीतते हार जाने वाली कांग्रेस पार्टी की असल सच्चाई क्या है, इसे भी पार्टी हाईकमान के समक्ष पेश किया गया। नैनीताल ने न सिर्फ जमीनी हकीकत से हाईकमान को रुबरु कराया बल्कि, कांग्रेस पार्टी के भीतर स्लिपर सेल की बात को उठाते हुए संगठन को लेकर भी कई नए प्रश्नों को जन्म दे डाला। संगठन के समक्ष चित्रित किया कि “प्रैक्टिस मैच ने नदारद रहने वाले नेता अचानक से कैप्टन बनकर आते हैं और जमीनी कार्यकर्ता दर्शक बन जाते हैं”।

 

 

जिलाध्यक्ष ने खोली शिकस्त की परतें

 

 

 

राजधानी दिल्ली में आयोजित पार्टी बैठक में उत्तराखंड का नंबर जब आया तो नैनीताल कांग्रेस जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल को अपनी बात रखने के लिए दो मिनट का समय दिया गया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति की सभी परतें संगठन के सामने खोल कर रख दी। जिलाध्यक्ष छिमवाल ने संगठन को मजबूत करने के संदर्भ में सुझाव दिया कि “सांगठनिक रूप से कमजोर होती चली गई कांग्रेस को संजीवनी तभी मिलेगी जब उसका संगठन मजबूत होगा, जिला कमेटी को ऊर्जा तब मिलेगी जब साल 1970 के समान कांग्रेस पार्टी अपने खेमें में संगठित होकर ऊर्जा भरेगी”। जिलाध्यक्ष ने यह कहने में कोई कोताही नहीं बरती कि वर्ष 1970 में कांग्रेस पार्टी के भीतर पार्टी के टिकट वितरण में कमेटी का सुझाव प्रथम था, लेकिन वर्तमान समय में स्थिति यह है कि टिकट वितरण की कमेटी में जिलाध्यक्ष की राय सबसे नीचे दर्ज होती है। इस प्रकार के बिंदु किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के लिए चिंता का विषय हैं।

 

 

 

 

क्रिड़ात्मक ढंग से दिखाई कांग्रेस की वास्तविक तस्वीर

 

 

 

 

अपने वक्तव्य में जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने वर्तमान समय में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की पीड़ा को क्रिड़ात्मक रुप में ढालते हुए कहा कि “प्रैक्टिस मैच में कुछ चेहरे नहीं दिखते हैं लेकिन जब फाइनल होता है तो वह कप्तान आकर बैटिंग करते हैं”, यह सीधा निशाना उन हस्तियों पर था जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर टिकट हासिल करते हैं और सालों से पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ता नए अवसरों कि तलाश में मात्र हाथ मलते रह जाते हैं। जिलाध्यक्ष ने अपने सुझाव में आगे कहा कि यदि पदाधिकारी अपने पद से हटता है तो भूतपूर्व बनाने के बजाए उसे जिम्मेदारी मिले ताकी वह काम करता रहे। वहीं यदि कोई जनप्रतिनिधि संगठन के खिलाफ बोलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार भी जिला कमेटी को मिलना चाहिए। दिल्ली की बैठक में कई राज्यों से जिलाध्यक्ष शामिल रहे, लिहाजा हर किसी जिलाध्यक्ष ने अपनी बात, अपने सुझाव पार्टी के समक्ष रखने थे लेकिन, नैनीताल ने वर्तमान समय की कांग्रेस का जो चरित्र-चित्रण किया है उससे इस बात पर कोई संदेह मात्र शेष नहीं रह जाता कि अन्य क्षेत्रों में भी पार्टी की स्थिति भी समान ही होगी। इससे साफ जाहिर होता है कि वर्तमान समय में नैनीताल में एक राष्ट्रीय पार्टी की जो स्थिति है और जो कुछ भी जिले में चल रहा है या यूं कहें कि कांग्रेस का जीतते-जीतते हार जाना भी इस सुझाव या यूं कहें कि इस शिकायत ने उसकी सभी शिकस्त परतों को सामने लाकर पेश कर दिया है।

 

 

 

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

 

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