एनएसजी कमांडो ने पत्नी और साली को मारी गोली, जनिए पूरा सच

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एनएसजी कमांडो ने पत्नी और साली को मारी गोली, जनिए पूरा सच

पारिवारिक कलह से परेशान एक NSG कमांडो ने मंगलवार को एनएसजी ट्रेंनिग सेंटर परिसर में पत्नी और साली को मशीन गन से गोली मारने के बाद आत्महत्या कर ली। पत्नी और साली की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। कमांडो जितेंद्र यादव की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना सुबह छह बजे की है। पुलिस ने कमांडो के शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया है। पत्नी-साली और कमांडो के परिजनों से पूछताछ के बाद ही असली कारणों का पता चल पाएगा।
एनएसजी परिसर के रिहायशी क्षेत्र में दूसरी मंजिल पर क्वार्टर नंबर-42 में जितेंद्र अपनी पत्नी गुड्डन (30), बेटे आयुष (2) और बेटी अंजलि (8) के साथ रहता था। करीब एक सप्ताह से साली खुशबू (19 ) भी यहां आई हुई थी। जितेंद्र यादव BSF में एएसआई के पद पर तैनात था। करीब दो साल पहले ही वह पांच साल के लिए एनएसजी में डेपुटेशन पर आया था।सोमवार रात को जितेंद्र यादव नाइट ड्यूटी पर था। मंगलवार सुबह करीब छह बजे वह अपने क्वार्टर पहुंचा। इसी दौरान बेडरूम में सो रही अपनी पत्नी से उसकी किसी बात पर बहस हुई और जितेंद्र ने पत्नी को गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर दूसरे कमरे में बच्चों के साथ सो रही साली खुशबू दौड़कर आई और वह शोर मचाने लगी। इस पर जितेंद्र ने उसे भी गोली मार दी। दोनों को गोली मारने के बाद जितेंद्र ने एक गोली खुद गले में मार ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।मानेसर थाने के एसएचओ राहुल देव ने बताया कि एएसआई जितेंद्र यादव के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है। परिजनों को बुधवार को शव सौंपा जाएगा। अभी मृतक के परिजनों व पत्नी के बयान का इंतजार है। उसी आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत होना पाया गया है।पुलिस ने कमांडो की मशीन गन को कब्जे लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने एनएसजी से भी पूछा है कि कमांडो की गन में कितनी गोलियां थीं। हालांकि तीन राउंड गोली चलने की बात सामने आ रही है। एनएसजी से जानकारी मिलने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।कमांडो जितेंद्र यादव ने सुबह घर में पत्नी के साथ हुई झड़प में आधुनिक मशीनगन एमपी-5 से पेट में गोली मारी। एमपी 5 (मास्चिने पिस्टल) पूरी दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल की गई सबमशीन गन है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों के पास दस आधुनिक हथियार में यह शुमार है। यह एक हल्की और दमदार मशीन गन है। इसकी गोली मार बेहतर है।एनएसजी कमांडो ने पहले पत्नी के पेट में गोली मारने के बाद दूसरे कमरे से आई साली के भी पेट में ही गोली मारी है। हालांकि डॉक्टरों ने दोनों के पेट से ऑपरेशन कर गोली निकाल दी है। दोनों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं, जबकि घटना के समय कमांडो के दोनों बच्चे दूसरे कमरे में सो रहे थे।एनएसजी के पीआरओ राकेश ने बताया, ‘इस मामले की हम खुद जांच कर रहे हैं। अभी तक पारिवारिक कलह की बात सामने आई है। जांच चल रही है। कमांडो ने अपनी सर्विसगन से गोली चलाई है।

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और खबरें

jail

14 साल जेल की सजा काटकर, निर्दोष साबित हुए मुकेश

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे रहने वाले मुकेश को निर्दोष साबित

होने मे 14 साल लग गए। निर्दोष होते हुए भी मुकेश को 14 साल जेल

की सजा काटनी पड़ी। रामप्रवेश तिवारी के बेटे मुकेश तिवारी जो कि

बलिया जिले के रेवती के वार्ड 11 के सभासद के रहने वाले 14 साल

जेल की सजा काटकर आज रिहा होकर अपने घर लौटे है। उनके घर

वापस आने पर उनके घर वाले बेहद खुश है लेकिन मुकेश को अपनी

जिंदगी के बहुमूल्य 14 वर्ष बरबाद होने का बेहद खेद है। 30 जुलाई

2007 को प्रताप शंकर मिश्र की हत्या के मामले मे प्रताप शंकर मिश्र

के परिजनों के दिए गए बयान के आधार पर मुकेश को आरोपी बनाया

गया था। मुकेश को जिला जज ने 2009 में सजा सुनाई थी। इससे नाखुस

मुकेश के परिवार जनों ने हाईकोर्ट में आपील की थी जहां सुनवाई चलती

रही। मुकेश को र्निदोष साबित करने के प्रयास चलते रहे लेकिन साथ ही

साथ मुकेश की सजा चलती रही। 14 साल बाद आखिरकार मुकेश को रिहाई मिली।

 

-कनक चौधरी  

 

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bengal

बंगाल पर आया नक्सलियों का सबसे बङा खतरा

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देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान अब नक्सली हमले

का खतरा भी सामने आने लगा है।देश के खुफिया एजेंसियों

के इनपुट बेसिस पर पांचो राज्यों की पुलिस को अलर्ट भी जारी की गई है।

खुफिया एजेंसी के मुताबिक पांच राज्यों की चुनावी प्रक्रिया में ये नक्सली रुकावट भी बन सकते हैं,

और इसका सबसे बङा खतरा पश्चिम बंगाल पर है।

बंगाल में नक्सलियों की घटती ताकत को देखने के बाद ऐसा कहा जा रहा है

की अब इनकी टीम ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो की तरफ जाने की कोशिश कर रही है।

यहां पिछले कुछ सालों से इनकी टीम लगातार कमजोर दिखाई पङ रही है।

ऐसे में चुनाव से पहले इसपर काबू पाने की तमाम कोशिशें की जा रही है।

खुफिया एजेंसियों से ऐसी सूचना मिली है की अब नक्सलियों का ग्रुप इस्टर्न रीजनल

ब्यूरो के करीबी राज्यों में हथियार जमा कर के उसे चुनाव के दौरान बंगाल में सप्लाई करने की योजना बना रहा है।

नक्सलियों के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो की शाखा के तहत बिहार

और झारखंड राज्य आते हैं जिनकी सीमा पश्चिम बंगाल से जुङी हुई है।

पिछले 4 महीनों से नक्सली कमांडरों के मूवमेंट बिहार और झारखंड में ज्यादा देखे गए हैं।

 

-शुभांगी कुमारी

 

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khaleda

बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा की बढ़ेगी जमानत

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को आज सरकार ने राहत

के संदेश दिए है। उनकी छह महीने की जमानत और बढ़ाई जा सकती

है। बांग्लादेश कानून मंत्रालय ने सोमवार को भ्रष्टाचार के दो मामलों में

दोषी नेता खालिदा जिया को दी गई जमानत की अवधि बढ़ा दी है। इसके

लिए आज सुबह गृह मंत्रालय को जानकारी भेजी गई।  खालिदा जिया को

भ्रष्टाचार के दो मामलों में 17 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। उन पर

जिया अनाथालय ट्रस्ट और जिया चेरिटेबिल ट्रस्ट दोनों में भ्रष्टाचार किए जाने

के मामले में यह सजा सुनाई गई थी। 25 महीने जेल में रहने के बाद 76 वर्षीय

खालिदा को कोरोना काल में सावधानी रखने के लिए छह महीने की जमानत

पर रिहा किया गया था। उसके बाद छह महीने की जमानत और बढ़ा दी गई

थी। महामारी के लंबे समय तक चलने की वज़ह से अब छह महीने की

जमानत बढ़ाने की कार्यवाही चल रही है। खालिदा जिया के भाई ने सरकार से

उनके स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को लेकर उनकी सजा माफ करने की अपील

भी की थी जिसमें अभी सरकार के फैसला आना बाकि है।

 

-मानवी कुकशाल 

 

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बांज का जंगल उगाकर,पहाड़ की महिलाएं बनी मिसाल

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पहाड़ों की रानी मसूरी की पहचान भटोली गांव की महिलाओं से है।

इन महिलाओं ने गांव के पास वीरान पहाड़ी पर दो हेक्टेयर में एक बांज का जंगल उगाया है।

ये सभी महिलाएं मिलकर इसका ख्याल रखती हैं।

कोई भी उनसे पूछे बिना जंगल में आ और जा सकता है, और वे जंगल का विशेष

ध्यान रखती हैं कि कोई जानवर जंगल में घुस न जाए।

अगर जगंल मे किसी कारण से आग लग जाती है तो सारी महिला एक जुट हो कर आग बुझाने मे लग जाती हैं

और इसमें गांवो के पुरुष भी सहायता करते हैं।

भटोली गांव में 25 परिवार रहते हैं, 22 साल पहले इस गांव की महिलाओं ने पास की एक

सुनसान पहाड़ी के दो हेक्टेयर हिस्से मे बांज के पौधे लगाए और जगंल

की पुरी सुरक्षा कीजिम्मेदारी ली और पोधौं को पेड़ बनाने मे अपना पूरा योगदान दिया

और आज परिणाम सबके सामने है। गांव की महिलाओं का कहना है

की इस काम में ना ही कभी पंचायत ने कोई मदद की

और ना तो वन विभाग वालों की तरफ से कोई सुविधा मिली।

उल्टा कैंप्टी वन रेंज की ओर से हमारे जगंल को उनके जगंलो के साथ

वन विभाग में मिलाने के लिए कहा गया है

हालाकिं भटोली गांव की महिलाओं ने साफ तौर पर नकार कर दिया है।

अब जंगल घना हैतो गांव वाले जगंल मे चारों ओर से तार की बाड़ करना चाहते हैं ।

इस कार्य के लिए उनके पास बजट नही है

और इस काम के लिए वन मंत्री और मुख्यमंत्री से मदद की उम्मीद कर रहा है।

कैम्पटी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी नीलम बर्त्वाल ने बताया

कि भटोली गांव की महिलाओं नेजोबांज का जंगल तैयार किया है

वोवास्तव में एक उदाहरण स्थापित करता है।

वन विभाग आग केसमयमे महिलाओं की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है।

जंगल में नमी का रखरखाव ऊपरी भाग में वन विभाग द्वारा किया गया है।

 

सौमिया

 

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police

हटाए जाएंगे पुलिस अफसर,गृह विभाग ने बनाई नई सूची

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तीन साल से एक ही जगह पर बने आईपीएस अफसरों को गृह विभाग

हटाकर नए अफसरों की पुष्टि की तैयारी कर रहा है।

इस साल जितने भी अफसर रिटायर होंगे उन्हें फील्ड से हटाकर दूसरी पोस्ट पर भेजा जाएगा।

गृह विभाग इसकी सूची तैयार कर रहा है।

खबरों के अनुसार जो अफसर तीन साल से एक ही जगह पर बने हुए हैं

उन्हें हटाने का आदेश ऊपर से मिल चुका है।

अधिकारी पीएसी का हो या किसी दूसरी पोस्ट पर हो,

उन सभी को नई पोस्ट पर तैनात करने की सूची गृह विभाग ने शुरू कर दी है।

ऐसे तो तैनात करने वाले अफसरों की गिनती 50 से अधिक बताई जा रही है।

और तो और बताया जा रहा है कि इस साल जो अफसर रिटायर होंगे

उन्हें भी दूसरी पोस्ट पर भेजने की तैयारी की जा रहीं है।

सूत्रों के अनुसार इस साल चार रेंज के आईजी भी रिटायर हो रहे है।

वहीं इस साल गृह विभाग ने पहले से तैनात कई अफसरों को बदलने की तैयारी की है।

 

कनक चौधरी

 

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womens

अब बदलते दौर में महिला शक्ति को चुनौतियों का करना होगा सामना

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टिंचरी माई का जन्म 1917 पौडी गढ़वाल के गरीब परिवार मे हुआ था।

टिंचरी माई का असली नाम दीपा नौटियाल था । टिंचरी माई ने अपनी

जिंदगी मे कई इम्तेहान तय किये थे। दीपा कि उर्म जब 5 साल की थी।

तब वह अपने माता–पिता को खो दिया था। प्रदेश मे गौरा देवी और टिंचरी

माई का मातृ शक्ति अबला नहीं सबला है। प्रदेश कि मातृ शक्ति चिपको

आंदोलन से लेकर शराबबंदी के  आंदोलन में अग्रिम मोर्चे में राज्य आंदोलन

ने एक अपनी अलग पहचान बनाई थी। अब बदलते समय में  महिलओं को

अलग अलग मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। चिपको आंदोलन, मैती

आदि से यह खुलकर सामने आया है, कि पहाड़ में आज भी महिलाओं को

खेती में काम कर देख  महिलाओं को किसान के रूप में देखा जाता है । 40

हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह  मे है । महिला किसानों को दो

बातों पर कठिन लड़ाई लड़नी पड़ती है। पहला खेती के पलायन का बोझ

उनके ऊपर है। दूसरा घर कि जिम्मेदारी भी इन्हीं  के पास होती है। वहीं

महिलओं के लिए आज भी रोजगार के मौके कम हैं। महिलओं को भी शिक्षा में अधिक मौके दिये जाने चाहिए।

 

पुष्पा रावत

 

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