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जवानों की शहादत बाद भी सख्त कार्रवाई के मूड में क्यों नहीं सरकार ?

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जवानों की शहादत बाद भी सख्त कार्रवाई के मूड में क्यों नहीं सरकार ?

देश की सुरक्षा में खड़े जवानों की सुरक्षा कैसे होगी ? इन जवानों की जान की कीमत की अहमियत नेताओं को कब पता चलेगा ? कब तक नक्सलियों के खिलाफ सिर्फ ऐसे ही कॉम्बिंग ऑपरेशन चलते रहेंगे और जवान शहीद होते रहेंगे ? कब तक नक्सलियों के गढ़ को नेस्तनाबूद करने का लक्ष्य सरकार तय करेगी ? कब तक ऐसे ही शहीद जवानों के प्रति सिर्फ संवेदना व्यक्त किया जाता रहेगा ? कब तक सरकारें नक्सलियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने को तैयार होंगी ? सुकमा में 25 जवानों के शहीद होने के बाद ये सारे सवाल एक बार फिर उठने लगे हैं।

दरअसल करीब 300 नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला कर दिया जिसमें 25 जवान शहीद हो गए और 6 जवान घायल हैं। घायल जवानों का कहना है नक्सलियों ने ग्रामीणों की मदद से हमला किया और ग्रामीण जवानों की रेकी कर रहे थे। हमला करनेवाले नक्सली जवानों के हथियार भी लूटकर ले गए। इस हमले के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तत्काल बैठक बुलाई। पीएम मोदी ने हमले पर दुख जताते हुए इस हमले को नक्सलियों की कायराना हरकत करार दिया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस हमले पर दुख जताते हुए इसे सोची समझी हत्या करार दिया साथ ही कहा कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे, ये हमला चुनौती के रूप में लिया जाएगा। इन सबके बीच अलग-अलग राज्यों के शहीद होनेवाले जवानों के परिजन सरकार से कड़ी कार्रवाई करने की अपील कर रहे हैं और शहीद जवानों के घर में शोक की लहर फैली हुई है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि विकास कार्यों से नक्सली बौखलाए हुए हैं। शायद तभी जिस सड़क की सुरक्षा में जवान लगे हुए थे उसे बनने में तीन साल लग गए और अबतक सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। रायपुर में शहीद जवानों को आज श्रद्धांजलि दी गई जिस दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। इस घटना के बाद से पूरे देशवासियों में नक्सलियों के प्रति आक्रोश है और सभी नक्सलियों के प्रति सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं लेकिन ये कार्रवाई कब होगी ये सरकार की इच्छाशक्ति के बाद ही पता चल पाएगा

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