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निजी स्कूलों कि मनमानी एवं शिक्षा के नाम पर लूट के खिलाफ तेज होने लगा जनमत

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निजी स्कूलों कि मनमानी एवं शिक्षा के नाम पर लूट के खिलाफ तेज होने लगा जनमत

देशभर में कुकुरमुत्ते की तरह खुले प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं. शिक्षा का केंद्र कहे जाने वाले विद्यालय अब बिजनेस के नाम पर लूट के केंद्र बनते जा रहे हैं.शिक्षा के इस व्यवसायीकरण से शिक्षा का स्तर बढ़ा है या नहीं ये तो पता नहीं लेकिन इससे प्राइवेट स्कूल दिनोंदिन मालामाल जरुर हो रहे हैं. कभी किताबों तो कभी ड्रेस के बहाने से अभिभावकों से हजारों रूपये कि रकम ठगी जा रही है. विरोध करने पर उनके बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जाता है. अपने बच्चे के अच्छे भविष्य के कारण अभिभावकों को इन स्कूलों का जुल्म सहना पड़ता है. इन प्राइवेट स्कूलों कि मनमानी कि शिकायतें लगातार प्रशासन और शासन से लगाई जा रही हैं. वहीं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आज उपजिलाधिकारी कोटद्वार ने खण्ड शिक्षा अधिकारी के साथ मिलकर दुगड्डा ब्लॉक के सभी प्राईवेट स्कूलों के साथ वार्ता रखी.जिसमें उपजिलाधिकारी और खण्ड शिक्षा अधिकारियों ने प्राईवेट स्कूलों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि उनकी तरफ से फीस बढो़त्तरी, ड्रेस और डेवलपमेंट चार्ज कि शिकायतें नहीं आनी चाहिए. इस  मीटिंग के सन्दर्भ मे उपजिलाधिकारी ने मीडिया को बताया कि विद्यालयों में नया शिक्षण सत्र शुरु हो गया है और लगातार अभिभावकों की ओर से स्कूलों की मनमानी की शिकायतें आ रही थी. अभिभावकों का आरोप था कि स्कूल फीस  वृद्धि के नाम पर तो कभी स्कूल की ड्रेस और किताबों के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं. स्कूलों की इस तरह की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उपजिलाधिकारी और खण्ड शिक्षा अधिकारी ने तीस अप्रैल तक किसी भी हालत में स्कूलों को विद्यालय प्रबंधन समिति(एसएमसी) का गठन करने का आदेश दिया है. और अगर विद्यालय निर्धारित समय पर एसएमसी का गठन नहीं करते हैं तो वि़द्यालय के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही कि जायेगी.

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