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बस माफियाओं के खेल से परिवहन विभाग घाटे में

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बस माफियाओं के खेल से परिवहन विभाग घाटे में

देहरादून के आई एस बी टी से रोजाना सैकड़ों बस अलग-अलग राज्यों के लिए रवाना होती हैं। लेकिन इस सब के बावजूद भी परिवहन निगम लगातार घाटे में चल रहा है। देहरादून आईएसबीटी पर रात के वक्त जब आप पहुंचेंगे तो आपको वहां पर प्राइवेट बस ट्रेवल्स के कुछ लोग आवाज लगाते नजर आ जाएंगे जो आपको ये कहकर अपनी बसों में ले जाएंगे कि वे तमाम सुविधाओं से लैस हैं और आपको उत्तराखंड परिवहन की बसों से ज्यादा सुविधा मिलेगी इतना ही नहीं जब हमारी टीम ने इनसे पैसेंजर बनकर बात की तो ये तरह-तरह के लालच देते नजर आए। जब इन से ये पूछा गया कि उनको इस तरीके से ISBT पर सवारियां लेने की इजाजत कौन देता है तो वह साफ कहते नजर आए कि उनको रोकने वाला कोई नहीं बल्कि वे तो पुलिस को भी खर्च देते हैं।

खुले आम बस माफियाओं के दलाल ISBT पर घूम रहे हैं। इनको किसी का डर नहीं क्योंकि ये सब  पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है वो कहते हैं ना कि जब सैंया भए कोतवाल  तो फिर डर काहे का । ISBT देहरादून पर बस माफियाओं का ये खेल आज से नहीं चल रहा है, बल्कि लंबे समय से ये खेल जारी है। रोजाना ISBT के आस-पास से ही 25 से 30 बसें इन बस माफियाओं के द्वारा खुलेआम चलाई जाती हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि इन बस माफियाओं और ट्रेवल्स की रोजाना की कमाई ISBT देहरादून से लगभग 15 से 20 लाख रूपए है। जो कि सीधे तौर पर परिवहन विभाग का नुकसान है इस बात को ISBT के अधिकारी भी मानते हैं उनका कहना है कि वे इस बात की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों को भी कर चुके हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई के नाम पर बस कुछ दिन के लिए इनको यहां से हटाया जाता है है लेकिन उसके बाद फिर से ये लोग बसों को चलाना शुरु कर देते हैं।वैसे तो परिवहन विभाग के अधिकारी बड़े – बड़े दावे करते हैं, लेकिन ये सब उन अधिकारियों को भी नजर नहीं आता। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इन बस माफियाओं को कौन संरक्षण दे रहा है और इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती। कब तक बस माफियाओं का खेल यूं ही जारी रहेगा और परिवहन विभाग घाटे का रोना रोता रहेगा।

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