Home » Uncategorized » श्रीनगर पॉलिटेक्निक कैम्पस में “एन आई टी” की कक्षाएँ अस्थाई रूप से चल रही है

श्रीनगर पॉलिटेक्निक कैम्पस में “एन आई टी” की कक्षाएँ अस्थाई रूप से चल रही है

Listen to this article

  श्रीनगर  में  “एन आई टी ”  पॉलिटेक्निक  कैम्पस  में अस्थाई  रूप से चल रही  है

पौड़ी गढ़वाल  के  सुमाड़ी   में   एन आई टी स्थाई  परिसर निर्माण  के  लिए  आठवें  दिन  भी श्रीनगर  में आंदोलनकारियों का  धरना   जारी  रहा । धरने  पर  बैठे  आंदोलनकारियों   ने  अब  भाजपा  डबल  इंजन  सरकार   से सुमाड़ी में   एन आई टी स्थाई  परिसर निर्माण   के  लिए  आर-पार  की   लड़ाई  का  मन बना  लिया   है  ।  आंदोलनकारियों  का   कहना   है  कि   जब  तक  सुमाड़ी  में  एन आई टी स्थाई  परिसर निर्माण  किया  जाता रहेगा  तब तक धरना  भी  जारी  रहेगा  । धरने  पर   बैठे आंदोलनकारियों  ने  सरकार को  चेतावनी  देते  हुए  कहा   कि अगर   एन आई टी स्थाई  परिसर निर्माण  सुमाड़ी  में  नहीं  हुआ  तो  उत्तराखण्ड  को बंद  कर  उग्र  आंदोलन   किया   जाएगा ।
 पौड़ी गढ़वाल  के  सुमाडी   में  600  करोड़   की  लागत से  बनने   वाली   एन  आई  टी 2009  में स्वीकृति   हो  गयी थी ।  2009  की स्वीकृति   के  बाद  ग्रामीणों  अपनी  120  हेक्टयर    के  बजाय  159  हेक्टयर   भूमि एन आई टी  को   स्थाई   रूप   से बनाने  के  लिए  प्नदान    भी   की गई ।  2014   में   शिलान्यास   होने   के  बाद   भी  स्थाई   परिसर   का निर्माण   नहीं   किया गया । आपको  यह  भी  बता  दें  कि   सुमाड़ी  में  स्थाई  निर्माण   नहीं  होने  की  वजह  से  2009-10   से  एन आई टी    श्रीनगर    के  पॉलिटेक्निक   कैम्पस  में अस्थाई   रूप   से   चल रही  है ।  8 वर्ष  का  लंबा अंतराल  बीत   जाने  के   बाद   भी  एन आई टी  के  सुमाड़ी  स्थाई  परिसर  का  निर्माण   नहीं  हुआ ।  आंदोलकारियों   का  कहना   है  कि  अब केंद्र सरकार  द्वारा  अड़चने  डाली   जा रही  हैं , कि  दान  में दी  गयी भूमि   एन आई टी स्थाई  परिसर  बनाने के लिए  उपयुक्त  नहीं  है ।   हालाँकि धरने   पर  बैठे  आंदोलकारियों का  कहना  है  कि (NIT) स्थाई परिसर निर्माण  भूमि  का   पहले  जियोलॉजिकल  सर्वेक्षण  के  बाद  स्वीकृति   मिली  है ।  धरने  पर  बैठे  आंदोलनकारियों  का  कहना है कि   पहाड़   के  विकास   के   लिए   उत्तराखंड   राज्य  की  लड़ाई  लड़ी  गयी  थी  ।  परन्तु   उत्तराखंड  के  नेताओं   ने  विकास   के बजाय  सत्ता   पर  काबिज   होकर   पहाड़  की   विकास  स्थिति  पहले  से  बदत्तर   कर  दी  है । जिससे   अब  लोग  केवल  पहाड़   से  पलायन   कर  रहे  हैं  ।  आंदोलनकारियों  ने  डबल  इंजन  भाजपा  सरकार  पर आरोप लगाकर  प्रधानमन्त्री   के  बयानों  का  खंडन करते  हुए   कहा   कि आज  उत्तराखंड  में  विकास  की स्थिति   बेहद  बद्द्तर   हो  गयी   है । भ्रष्टाचार कम  होने  के  बजाय  बढ़  रहा है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *