Home » Uncategorized » सरकार के लिए गर्म दूध बनी शराब, न उगलते बन रही न निगलते

सरकार के लिए गर्म दूध बनी शराब, न उगलते बन रही न निगलते

Listen to this article

सरकार के लिए गर्म दूध बनी शराब, न उगलते बन रही न निगलते

प्रदेश में इन दिनों शराब की दुकानों को लेकर सरकार पसोपेश में है। सरकार आबकारी से होने वाले राजस्व को भी नहीं छोड़ पा रही है तो जनता की नाराजगी भी मोल नहीं लेना चाहती। यही कारण है कि अभी तक सरकार को प्रदेश में शराब की दुकानों को लेकर बार-बार अपना स्टैंड बदलना पड़ रहा है। प्रदेश को मिलने वाले  राजस्व में एक बड़ा भाग आबकारी विभाग का होता  है। बीते वर्ष आबकारी महकमे से सरकार को 1890 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। हर वर्ष सरकार इस राजस्व में दस फीसद की बढ़ोतरी करती है। जाहिर है कि इस बार आबकारी का लक्ष्य दो हजार के पार रखा जाना है। बीते वर्ष तक तो सब ठीक था लेकिन अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार फंसी हुई नजर आ रही है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल व स्टेट हाइवे से पांच सौ मीटर के दायरे में शराब की दुकानें खोलने पर पाबंदी लगाई है। सरकार को ये दुकानें शिफ्ट करनी पड़ रहीं हैं लेकिन जहाँ भी सरकार इन्हें शिफ्ट करने जा रही है वहां  इन दुकानों का तीव्र विरोध हो रहा है। जनता के लगातार बढ़ते आक्रोश के चलते अभी तक आधे से अधिक दुकानों के लिए जगह फाइनल नहीं हो पा रही है। सरकार भी इस मसले को समझ रही है। भय व भ्रष्टाचार मुक्त राज्य व सुशासन का वादा लेकर सत्ता में आई भाजपा इस मामले में जनता की नाराजगी भी मोल नहीं लेना चाहती, तो इतने बड़े राजस्व को भी नहीं गंवाना चाहती। यही कारण है कि अब जनता की राय लेकर नई आबकारी नीति बनाने की बात कही जा रही है ताकि जनता भी नाराज न हो और सरकार को राजस्व का नुकसान भी न उठाना पड़े।आबकारी नीति को लेकर सरकार खुद ही उलझी हुई है बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को इसी नीति में घेर कर अपना निशाना बनाया था अब यही नीति बीजेपी सरकार के गले की भी फांस बानी हुई है।अब देखना ये होगा की सरकार इस मामले से कैसे बाहर निकलती है, फिलहाल तो यह मामला गर्म दूध बना हुआ है सरकार के लिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *