देवउठनी एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम

भगवान विष्णु को समर्पित देवउठनी एकादशी का व्रत आज, 1 नवंबर 2025 को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।

इस दिन भगवान विष्णु की भव्य पूजा की जाती है। इसे देवोत्थान एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है।

क्या है देवउठनी एकादशी?

मान्यता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) के बाद इस दिन जागते हैं। इन महीनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

देवउठनी एकादशी से ही विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ जैसे मंगल कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन से जीवन में फिर से शुभ समय का आगमन होता है।

देवउठनी एकादशी से ही विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ जैसे मंगल कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन से जीवन में फिर से शुभ समय का आगमन होता है।

इस दिन कुछ काम वर्जित माने जाते हैं, जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

देवउठनी एकादशी पर क्या न करें?

स्नान करने के बाद ही तुलसी माता को स्पर्श करें। गंदे हाथों से तुलसी को छूने पर भगवान विष्णु अप्रसन्न होते हैं।

तुलसी को गंदे हाथों से न छुएं

इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं।

तुलसी के पत्ते न तोड़ें

देवउठनी एकादशी के दिन बाल काटना या शेविंग करना अशुभ माना जाता है।

बाल या नाखून न काटें

इस दिन चावल किसी भी रूप में खाने से बचना चाहिए।

 चावल का सेवन न करें

इस दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन वर्जित है। सात्विक भोजन ही शुभ फल देता है।

तामसिक भोजन से परहेज करें