कई राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है यह पर्व
मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाई जाती है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का पर्व है, जो एक नई शुरुआत का प्रतीक है।
इस दिन खेतों में नई फसल की कटाई होती है, और यह कृषि उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
इसके अलावा देशभर में अलग-अलग तरीकों से मकर संक्रांति मनाई जाती है.
मकर संक्रांति को गुजरात में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहां लोग 'काई पो चे' के नारे लगाकर पतंगबाजी करते हैं।
प्रयागराज में मकर संक्रांति पर संगम स्नान का महत्व है, जहां लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं।
मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जिसमें चार दिन तक किसानों की पूजा और नई फसल से बना मीठा पोंगल तैयार किया जाता है।
जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, और लोग पारंपरिक लोकगीत गाते हैं।
महाराष्ट्र में मकर संक्रांति पर लोग एक-दूसरे को तिलगुल देते हैं और 'तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला' बोलते नजर आते हैं.
पंजाब में मकर संक्रांति लोहड़ी के रूप में मनाई जाती है, जहां लोग आग जलाकर फसल की खुशी मनाते हैं और लोक गीत गाते हैं।