Home एचएनएन स्पेशल चम्बल में आतंक के पर्याय आत्मसमर्पित डकैत मोहर सिंह का हुआ निधन

चम्बल में आतंक के पर्याय आत्मसमर्पित डकैत मोहर सिंह का हुआ निधन

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भारत में चम्बल घाटी से जुड़ी कई प्रसिध्द कहानियां है, चम्बल घाटी से जुड़ी डकैतों पर कई बॉलीवुड फिल्म भी बने। वहीं कुख्यात चम्बल घाटी में अपने आतंक की अनगिनत कहानियां और किंवदंतियां लिखने वाले आत्मसमर्पित डकैत सरगना मोहर सिंह का निधन हो गया। वे 92 साल के थे।

बता दें कि चम्बल घाटी आत्मसमर्पित डकैत सरगना मोहर सिंह का बीते कल लंबी बिमारी के कारण निधन हो गया। बात करें मोहर सिंह की तो 60 के दशक के प्रसिध्द और इनामी डकैत रहे थे। उन पर एमपी, यूपी, राजस्थान आदि राज्यों की पुलिस ने दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। जिसका आज के अनुसार मूल्यांकन दस करोड़ से अधिक है।

इसके आलाव मोहर सिंह के खिलाफ देश के विभिन्न थानों में तीन सौ से अधिक हत्या के मामले दर्ज थे, लेकिन बकौल मोहर सिंह ये गिनती बहुत कम थी। लेकिन आत्मसमर्पण के बाद मोहर सिंह ने भिण्ड जिले के मेहगांव कस्बे को अपना घर बनाया वही रहने लगे।

मोहर सिंह उस गांव में दाढ़ी वाले शख्स के नाम से ही विख्यात थे। वे हँसमुख और मिलनसार थे। इसलिए हर उम्र के लोगों में उनकी खासी लोकप्रियता थी। बता दें कि वे एक बार नगर पालिका मेहगांव के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और निर्दलीय ही जीत गए। उन्होंने इस दौरान विकास के काम भी कराए। लोगो ने उनसे फिर चुनाव लड़ने को भी कहा तो उन्होंने मना कर दिया ।

फिल्मी सफर

मोहर सिंह और माधो सिंह कहने को तो अलग-अलग गिरोह थे लेकिन दोनों के बीच खूब याराना था । मोहर सिंह द्वारा माधो सिंह का बहुत आदर किया जाता था । दोनों गैंग ने एक साथ आत्मसमर्पण किया और फिर जेल में रहकर मुकद्दमे निपटाने के बाद ही बाहर आये ।  बाद में चम्बल के डाकू नाम से एक फ़िल्म भी बनी इसमें मोहर सिंह और माधो सिंह दोनों ने अपनी भूमिकाएं भी निभाई ।
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