दिल्ली में 31 मई तक बढ़ा लॉकडाउन: मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को एक हफ्ते यानी 31 मई तक के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया हैं। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर केस इसी तरह से घटते रहे, जैसे अभी घट रहे हैं तो हम धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील देंगे। केजरीवाल ने कहा कि केस घट रहे हैं और पॉजिटिविटी रेट में भी कमी आई है। तीसरी लहर के आने की आशंका है और हम इसके लिए तैयारियां कर रहे हैं।

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 3 अहम बातें

1. संक्रमण दक काबू में आई
दिल्ली में आज कोरोना की ये वेव कमजोर होती नजर आ रही है। पिछले 24 घंटे में दिल्ली में संक्रमण दर 2.5% के भी नीचे चली गई है। अप्रैल में संक्रमण दर 36% तक पहुंच गई थी। पिछले 24 घंटे में दिल्ली में कोरोना के 1,600 केस आए हैं।

2. तीसरी लहर से बचने का प्लान
अगर सभी को वैक्सीन लग जाए, तो मुमकिन है कि तीसरी लहर नहीं आए। हम जल्द से जल्द सभी को वैक्सीन लगवाने की योजना बना रहे हैं। हम अपना बजट खर्च करने को तैयार हैं। इसके लिए हम देश और विदेश की कंपनियों के साथ संपर्क में हैं।

3. युध्द अभी बाकी
वैक्सीन की बहुत कमी है, लेकिन वैक्सीन की समस्या का समाधान हम सब मिलकर निकालेंगे। डॉक्टर्स और नर्स पूरी तरह से सेवा भाव में जुटे हुए हैं। इसी बीच हमने अपने कई डॉक्टर्स को खोया भी है। युद्ध अभी बाकी है।

 

शिवानी

 

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निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए जनता से मांगे सुझाव

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हिमाचल प्रदेश निजी स्कूल (फीस और अन्य मामलों का विनियमन) विधेयक 2021 में आवश्यक बदलाव करने के लिए सरकार ने जनता से सुझाव मांगे हैं। 15 मार्च 2021 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई मंत्रियों ने विधेयक के बिंदुओं से असहमति जताते हुए इस प्रस्ताव को विद्ड्रा करवा दिया था। अब सरकार के निर्देशानुसार उच्च शिक्षा निदेशालय ने आम जनता से बीस जून तक विधेयक को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाने को कहा है। इच्छुक लोग उच्च शिक्षा निदेशालय या जिला उपनिदेशक कार्यालयों में लिखित में या निदेशालय की वेबसाइट पर ऑॅनलाइन अपने सुझाव दे सकेंगे।

आम जनता से मिलने वाले सुझावों के आधार पर दोबारा से विधेयक को तैयार कर मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने को लेकर बीते एक वर्ष से प्रदेशभर से मांग उठ रही है। शिक्षा विभाग ने इस बाबत प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल को भेजा था, उम्मीद जताई गई थी कि बजट सत्र में विधेयक को कानून बनाया जाएगा, लेकिन कुछ मंत्रियों की आपत्ति से मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब शिक्षा विभाग ने विधेयक को लेकर दोबारा कसरत शुरू की है। इस विधेयक के तहत जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में बनाई जाने वाली कमेटी में निजी स्कूलों की फीस निर्धारित की जाएगी।

कमेटी में निजी स्कूल प्रबंधन के अलावा पीटीए को शामिल किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली कमेटी फीस को मंजूरी देगी। कमेटी में अतिरिक्त निदेशक और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को शामिल किया जाएगा। जिला उपनिदेशकों की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी स्कूलों में फीस वसूली की व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेगी।

निजी स्कूलों में दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर फीस तय की जाएगी। स्कूल प्रबंधन और पीटीए (पेरेंट्स-टीचर एसोसिएशन) से चर्चा की जाएगी। सभी के सुझाव लेने के बाद फीस को तय किया जाएगा। फीस तय करने में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि फीस अभिभावकों का शोषण करने वाली न हो। इसके अलावा फीस में हर साल होने वाली बढ़ोतरी के लिए भी प्रावधान किया जाएगा।

 मीना छेत्री

 

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सरकारी अफसरों व कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण नीति जारी

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प्रदेश सरकार ने सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के स्थानांतरण का रास्ता साफ कर दिया है । 15 जुलाई तक तबादले किए जा सकेंगे। तबादले यथासंभव ऑनलाइन मेरिट बेस्ड किए जाएंगे। तबादले की प्रक्रिया वही होगी जो 2018 में जारी तबादला नीति में तय की गई थी। बताते चलें प्रदेश सरकार ने स्थानान्तरण सत्र 2020-21 में कोविड-19 महामारी की वजह से स्थानांतरण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। लेकिन पूरे सत्र तबादले नहीं किए जा सके थे। तभी से सरकारी कार्मिक तबादला नीति का इंतजार कर रहे थे। आम कार्मिकों की दिक्कत ये भी थी कि जिनकी पहुंच और पकड़ थी, उनके ताबदले प्रशासनिक आधार पर हो जा रहे थे। नियुक्ति विभाग ने वर्ष भर गुपचुप तबादले किए। यहां तक कि तबादला आदेश पब्लिक डोमेन में जारी करने बंद कर दिए गए।

दूसरी ओर जो पारिवारिक समस्या, बीमारी या अन्य वाजिब कारण से तबादला चाहते थे, उनका तबादला नहीं हो पा रहा था। विभागों के स्तर पर समस्याओं का सामना कर रहे कार्मिकों के तबादलों की अर्जियां बढ़ती जा रही थी। स्थानान्तरण सत्र 2021-22 के लिए सामान्य स्थानान्तरण अवधि 31 मई, 2021 भी बीत गई थी, लेकिन सरकार ने तबादला नीति पर निर्णय नहीं किया था।

दूसरा, चुनावी वर्ष की वजह से भी तबादलों पर लगी रोक हटाने का दबाव था। ‘अमर उजाला’ ने कार्मिकों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। मंगलवार को शासन ने तबादले पर रोक हटाते हुए नीति के अनुसार स्थानान्तरण का आदेश जारी कर दिया है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने शासन के समस्त अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को इस संबंध में दिशानिर्देश जारी कर दिया है।

इस तरह होंगे तबादले

– समूह क व ख के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में कुल तीन वर्ष पूरा कर चुके हैं, उन्हें संबंधित जिलों से ट्रांसफर होंगे।
– समूह क व ख के जिन अधिकारियों ने मंडल में सात वर्ष पूरा कर लिया है, को उन मंडलों के बाहर स्थानान्तरित होंगे।
– समूह क के अधिकारियों को उनके गृह मंडल तथा समूह ख के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। हालांकि यह प्रतिबंध केवल जिला स्तरीय विभागों व कार्यालयों में ही लागू होगा।

विभाग के कुल कर्मियों का 20 प्रतिशत ही तबादला

2018 की नीति के अनुसार विभागों में स्थानान्तरित अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या विभाग के समस्त अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या के 20 प्रतिशत तक सीमित रखी जाएगी। इस सीमा से अधिक स्थानान्तरण की जरूरत पर समूह क व ख के लिए मुख्यमंत्री और समूह ग व घ के लिए विभागीय मंत्री से अनुमति लेनी होगी।

समूह ‘ग’ के पटल परिवर्तन की विशेष व्यवस्था

समूह ‘ग’ के जिन कार्मिकों ने एक पटल पर तीन वर्ष पूरा कर लिया है, उनके पटल बदल दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा संख्या में कर्मी इसी श्रेणी में आते हैं। लंबे-लंबे समय से एक ही क्षेत्र या पटल पर जमे कर्मी इस व्यवस्था से हट जाएंगे।

मीना छेत्री

 

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आमिर खान ने साझा किया ‘लाल सिंह चड्ढा’ का नया लुक

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महाराष्ट्र में कोरोना के मद्देनजर लॉकडाउन के बाद अनलॉक के फ़िल्मों की शूटिंग फिर शुरू हो चुकी है। ऐसे में आमिर खान अपनी निर्माणाधीन फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग पर लौट आए हैं। मंगलवार यानी 15 जून को फिल्म ‘लगान’ की रिलीज के बीस साल पूरे हुए है। इस मौके पर अभिनेता आमिर ने अपने फैंस का शुक्रिया अदा करने के लिए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वो सैन्य अधिकारी की वर्दी में दिखे।

मालूम हो कि अभिनेता ने इसी साल जनवरी में सभी सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिया था। अब आमिर सोशल मीडिया पर सिर्फ अपनी प्रोडक्शन कम्पनी आमिर खान प्रोडक्शंस के आधिकारिक अकाउंट के ज़रिए जुड़े हुए हैं। इस अकाउंट से आमिर का एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें उन्होंने लगान के लिए सभी का शुक्रिया अदा किया। इस वीडियो में आमिर कहते हैं, ‘आज लगान के बीस साल पूरे हो गए हैं। हम सबके लिए बहुत खुशी का दिन है। लगान एक ऐसी फ़िल्म थी, जिसने हम सबसे ख़ूब लगान वसूल किया।

बहुत ही मुश्किल फिल्म थी बनाने के लिए और हम सबने बहुत से चैलेंज का सामना किया था। इस फिल्म ने हमसे खूब लगान वसूल किया, लेकिन उतना ही हमें दिया भी।आमिर ने आगे कहा, ‘इस सफर में जो लोग मेरे साथ थे, उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। सबसे पहले तो आशुतोष गोवारिकर का और सारे कास्ट और क्रू का।

हमारे डिस्ट्रिब्यूटर्स का, हमारे एग्ज़िबिटर्स का। ख़ास तौर पर अपनी ऑडिएंस का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जिसने हमारी फ़िल्म को इतना प्यार, इतनी इज़्ज़त दी। आमिर कहते हैं, ‘आज शूटिंग चल रही है और मैं पैकअप करके घर जाऊंगा तो ऑनलाइन लगान की पूरी टीम एक-दूसरे से मिलेगी।’

 

 मीना छेत्री

 

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महाकुंभ की एक महीने की अवधि में 11 निजी लैब की कोविड जांच बनी गले की फांस

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महाकुंभ की एक महीने की अवधि में बार्डर से लेकर मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की कोविड आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच की फांस मेला प्रशासन के गले फंस गई है। मेला प्रशासन ने 11 निजी लैब को कोविड जांच के लिए अधिकृत किया था। 11 लैब ने एक महीने की अवधि में दो लाख 51 हजार जांच की हैं। इनमें भी दो लैब से सर्वाधिक एक लाख 23 हजार जांचें हुई हैं। सर्वाधिक जांच करने वाले लैब को मेला अधिष्ठान ने थर्ड पार्टी अनुबंध किया गया था और इनकी ही रिपोर्ट में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

कोरोनाकाल में महाकुंभ आयोजन कोविड का सुपर स्प्रेडर बना। हाईकोर्ट के आदेश पर श्रद्धालुओं की कोविड जांच की संख्या बढ़ाई गई। कोविड जांच के लिए 34 सरकारी और निजी लैब को लगाया गया। इनमें 11 निजी लैब को मेला प्रशासन ने अनुबंधित किया।

एक माह की अवधि में सभी लैब ने चार लाख श्रद्धालुओं की जांच की। जिला प्रशासन और शासन की ओर से नामित 23 लैब को छोड़ दिया जाए तो मेला प्रशासन की ओर से अनुबंधित 11 लैब ने दो लाख 51 हजार श्रद्धालुओं की जांच की।

इनमें 44,278 आरटीपीसीआर और 206,722 एंटीजन जांच हुई हैं। इनमें अधिकतर जांच रिपोर्ट निगेटिव आए। निगेटिव जांच रिपोर्ट से कुंभ आयोजन पर सुपर स्प्रेडर का धब्बा लगने से बच गया और सरकारी आंकड़ों में भी जांचों की संख्या कई गुना बढ़ गई।

 

 मीना छेत्री

 

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अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती से कोलकाता पुलिस की पूछताछ

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अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान उनके विवादास्पद भाषण को लेकर कोलकाता पुलिस आज उनसे पूछताछ कर रही है। विवादित भाषण से संबंधित मामले में मिथुन के खिलाफ मानिकलता पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर मिथुन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।

मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस को मिथुन से पूछताछ करने का निर्देश दिया था। इसी सिलसिले में पुलिस उनसे वर्चुअली पूछताछ कर रही है। भाजपा में शामिल होते ही मिथुन चक्रवर्ती ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए थे। चुनावी मंच से उन्होंने कहा था, “मैं एक नंबर का कोबरा हूं.. डसूंगा तो तुम फोटो बन जाओगे” उन्होंने आगे कहा कि वो गरीबों की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं राजनीति नहीं, मनुष्य नीति करता हूं।

भड़काऊ बयान देने पर हुई थी एफआईआर दर्ज

7 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मिथुन चक्रवर्ती ने भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में शामिल होने के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने ममता के खिलाफ एक के बाद एक बयान देकर राज्य की राजनीति गरमा दी थी। उनकी टिप्पणी पर टीएमसी ने थाने में भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवायी थी।

 

मीना छेत्री

 

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बसपा विधायकों की अखिलेश से मुलाकात पर मायावती का हमला

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पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से बसपा विधायकों की मुलाकात पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने ट्वीट कर हमला बोला है। मायावती ने कहा कि जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है। बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने का मीडिया में प्रचारित करने के लिए सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है।

मायावती ने लिखा कि-घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं घोर छलावा है।

उन्होंने आगे लिखा कि जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बीएसपी से निलंबित किया जा चुका है।

सपा में अगर इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं। जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बंद किया। खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय।

वैसे बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है। यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है जो जारी रहेगा।

 

मीना छेत्री

 

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