देहरादून के 34 वार्डो में नगर-निगम ने किया सैनिटाइजेशन

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देहरादून शहर में कोविड कर्फ्यू के अंतर्गत रविवार को नगर निगम के 34 वार्डों में सैनिटाइजेशन किया। इससे पहले शनिवार को 35 वार्डों में निगम ने अभियान चलाया था, जबकि आज शेष 31 वार्ड में अभियान चलाया जा रहा है। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने अभियान का जगह-जगह निरीक्षण किया। वहीं, महापौर सुनील उनियाल गामा ने भी सैनिटाइजेशन कर रही टीमों के साथ वार्डों में पहुंच जनता को कोरोना के खतरे के प्रति आगाह किया। मुख्य सड़कों के साथ-साथ गली-मोहल्लों, मुख्य बाजार, सरकारी, अर्द्ध सरकारी समेत निजी कार्यालयों में सोडियम हाइपोक्लोराइट दवा के तकरीबन 2.10 लाख लीटर मिश्रण का छिड़काव कराया गया। इस दौरान 37 टैंकर छिड़काव करने में लगाए गए।

शहर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए देहरादून शहर में प्रशासन ने सोमवार तक लागू कोविड कर्फ्यू को अब छह मई तक बढ़ा दिया है। इस दौरान दून नगर निगम को हर सप्ताह सैनिटाइजेशन के आदेश दिए गए थे। इसके लिए नगर निगम ने शहर को आठ जोन में बांटा है। शनिवार को दो जोन व रविवार को तीन जोन जबकि सोमवार के लिए तीन जोन बनाए गए। इसी क्रम में रविवार को 34 वार्ड सैनिटाइज किए गए।

सुबह महापौर गामा एवं नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने नगर निगम परिसर से दवा के मिश्रण वाले ट्रैक्टर-टैंकरों को वार्डों में रवाना किया। निगम टीमों ने मालसी, दून विहार, विजयपुर, राजपुर, धोरणखास, आर्य नगर, जाखन, सालावाला, डोभालवाला, विजय कालोनी, डीएल रोड, रिस्पना, इंद्रा कालोनी, बकरालवाला, चुक्खुवाला समेत किशननगर, घंटाघर कालिका मंदिर, एमकेपी, तिलक रोड, खुड़बुड़ा, शिवाजी मार्ग, इंद्गेश नगर, धामवाला, झंडा मोहल्ला, यमुना कालोनी, गोविंदगढ़, लक्खीबाग, अधोईवाला, गुजराड़ा मानसिंह, आमवाला तरला आदि में अभियान चलाया।

आज यहां होना है सैनिटाइजेशन

जोन-1: वार्ड-96 नवादा, वार्ड-39 इंद्रानगर, वार्ड-40 सीमाद्वार, वार्ड-42 कांवली, वार्ड-86 सेवलाकलां, वार्ड-87 पित्थूवाला, वार्ड-88 मेहूंवाला, वार्ड-89 हरभजवाला, वार्ड: 91 चंद्रबनी, वार्ड-92 आरकेडिया प्रथम व वार्ड-93 आरकेडिया द्वितीय।

जोन-2: वार्ड-20 रेसकोर्स उत्तर, वार्ड-28 डालनवाला उत्तर, वार्ड-29 डालनवाला पूरब, वार्ड-30 डालनवाला दक्षिण, वार्ड-72 देहराखास, वार्ड-73 विद्या विहार, वार्ड-74 ब्रह्मपुरी, वार्ड-75 लोहियानगर, वार्ड-80 रेस्टकैंप और वार्ड-81 रेसकोर्स दक्षिण।

जोन-3: वार्ड-31 कौलागढ़, वार्ड-32 बल्लूपुर, वार्ड-36 विजय पार्क, वार्ड-37 वसंत विहार, वार्ड-38 पंडितवाड़ी, वार्ड-41 इंद्रापुरम, वार्ड-43 द्रोणपुरी, वार्ड-44 पटेलनगर पश्चिम, वार्ड-45 गांधीग्राम और वार्ड-71 पटेलनगर पूरब।

 

-मानवी कुकशाल

 

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और खबरें

परिवहन विभाग ने प्राइवेट बसों के चालकों की सहायता राशि का प्रस्ताव सरकार को भेजा

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कोरोना काल में कर्फ्यू के कारण खड़ी स्टेज कैरिज की बसों के संचालकों को परिवहन विभाग ने सहायता राशि देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसमें छह माह की टैक्स माफी व 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव शामिल है। विभाग के अनुसार आर्थिक सहायता सिर्फ उन बस आपरेटरों को मिलेगी, जिनकी बस मौजूदा हालात में 50 फीसद यात्री क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं।

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि स्टेज कैरिज के अंतर्गत संचालन करने वाले निजी बस आपरेटरों ने सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण के कारण 50 फीसद यात्री क्षमता के साथ वाहन संचालन की एवज में पिछले साल की तरह किराया दोगुना करने की मांग की थी। यह मांग पूरी ना होने पर ट्रांसपोर्टरों ने टैक्स माफ करने, आर्थिक सहायता प्रदान करने समेत बीमा राशि माफ करने की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर ज्यादातर बस आपरेटरों ने बसों के परमिट सरेंडर कर दिए थे।

इस संबंध में अब परिवहन विभाग की ओर से स्टेज कैरिज के निजी बस आपरेटरों को सहायता राशि देने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। आरटीओ सैनी ने बताया कि ऐसी करीब 2800 बसें प्रदेश में हैं। इनमें सिटी बस, टीजीएमओ, केएमओ, विश्वनाथ सेवा, डाकपत्थर यूनियन आदि की बसें शामिल हैं। इनमें करीब 2000 बसें आनरोड रहती हैं। परिवहन विभाग ने इन्हें छह माह की टैक्स माफी और संचालन की सूरत में 10 से 15 हजार प्रतिमाह आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। आर्थिक सहायता राशि तब तक देने का प्रस्ताव दिया गया है, जब तक 50 फीसद यात्री क्षमता के साथ संचालन की व्यवस्था लागू रहेगी।

मानवी कुकशाल

बहन की जान बचाने के लिए भाई ने दांव पर लगा दी अपनी जिंदगी

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एक तरफ कोरोना महामारी ने जहां रिश्तों में दूरियां ला दी हैं, वहीं पुराना गोरखपुर मोहल्ले में एक संक्रमित युवक ने खुद की परवाह किए बिना न केवल अपनी गर्भवती बहन बल्कि अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों की उखड़ती सांसें बचाई। संक्रमित होने के बावजूद खुद ऑक्सीजन की व्यवस्था की। करीब 50 किलोमीटर एंबुलेंस चलाते हुए सिलिंडर लेकर आया। सोमवार को जब दोनों भाई-बहन कोरोना से जंग जीतकर घर लौटे तो पूरे मोहल्ले के लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।

फार्मा कंपनी में रिजनल मैनेजर पद पर काम करने वाले पंकज शुक्ला अपनी पत्नी, दो बेटियों और मां के साथ पुराना गोरखपुर मोहल्ले में रहते हैं। साल 1986 में पिता का देहांत होने के बाद कम उम्र में ही उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। छत्तीसगढ़ के विलासपुर में रहने वाले बहनोई के भी अकेले होने से 15 अप्रैल को घर वालों ने गर्भवती बहन को देखरेख के लिए गोरखपुर बुला लिया था। कुछ दिन बाद बहन सर्दी-जुकाम हुआ तो उन्होंने डॉक्टर से सलाह ली।

डॉक्टर ने पहले कोविड जांच कराने के लिए कहा। 12 अप्रैल को जांच कराई तो बहन पॉजिटिव निकली। इस पर पंकज ने भी जांच कराई तो वह भी संक्रमित मिले। दो दिन बाद आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आई तो उसमें भी दोनों पॉजिटिव मिले। दवा तब तक शुरू हो गई थी, लेकिन अचानक बहन को सांस लेने में दिक्कत होने लगी।पंकज कहते हैं कि यह देखकर उनके आंखों के सामने अंधेरा छा गया। शहर के हालात देख उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी हालत में बेड कहां मिलेगा। फार्मा लाइन के संबंध काम आए और गोरखनाथ क्षेत्र स्थित गोरखपुर हॉस्पीटल के डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बहुत मदद की। अपने अस्पताल में बेड दिलाया। बहन के साथ वह भी भर्ती हो गए।

प्लांट से ऑक्सीजन सिलिंडर खुद लाने का प्रस्ताव रखा

28-29 अप्रैल को शहर के ऑक्सीजन प्लांट बंद होने से अस्पताल का ऑक्सीजन खत्म होने के कगार पर पहुंच गया। अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों के परिजनों को बताया कि अब डेढ़ घंटे का ही ऑक्सीजन उनके पास है। यह सुनकर पंकज के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने कई जगह फोन किया, लेकिन बात नहीं बनी। आखिर में रोने-गिड़गिड़ाने पर आरके ऑक्सीजन प्लांट के कर्मचारी ने ऑक्सीजन देने के लिए हामी भरी। लेकिन शर्त रखी कि खाली ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आना होगा। साथ में ऑक्सीजन का पत्र भी पंकज कहते हैं कि उन्होंने डॉक्टर को इसकी सूचना दी, मगर पता चला कि अस्पताल के पास जो एंबुलेंस है उसका चालक बीमार है। कुछ समझ में नहीं आया तो पंकज ने डॉक्टर से गुजारिश की।

प्लांट से ऑक्सीजन सिलिंडर खुद लाने का प्रस्ताव रखा। बहुत अनुरोध के बाद अस्पताल प्रबंधन तैयार हो गया। अस्पताल के कर्मचारियों की मदद से पंकज ने खुद पांच-छह सिलिंडर एंबुलेंस में रखा। स्टाफ ने उन्हें सैनिटाइज करने के साथ ही अन्य जरूरी बचाव के इंतजाम किए। पंकज गोरखनाथ से एंबुलेंस चलाते हुए गीडा स्थित आरके ऑक्सीजन प्लांट आए और वहां से सिलिंडर भरवाकर दोबारा अस्पताल पहुंचे। इस बीच कई मरीजों के परिजनों ने फोन कर जल्द आने की गुहार लगाई। जब वह अस्पताल पहुंचे तो मरीजों के साथ मौजूद प्रत्येक परिजन का चेहरा खिल गया। तब तक ऑक्सीजन खत्म होने वाली थी। आनन-फानन स्टाफ ने ऑक्सीजन लगाया, जिससे पंकज की बहन समेत सभी मरीजों की उखड़ती सांसें लौट सकीं।

पंकज कहते हैं कि अस्पताल प्रशासन ने उनकी बहुत मदद की। खासकर डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने। बेड दिलाने से लेकर पूरी तन्मयता से उन्होंने इलाज किया। उन्हीं की देन है कि वे भाई-बहन दोनों कोरोना से जीत सके। आरके प्लांट के कर्मचारी और उनके मालिक को भी धन्यवाद। उन्होंने मजबूरी समझी और मुश्किल वक्त में मदद की।

मीना छेत्री

नगालैंड में भाजपा यूनिट के नए अभियान की शुरुआत

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नगालैंड की भाजपा यूनिट ने राज्य में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए एक नए अभियान की शुरुआत करने का फैसला लिया है। इसके तहत कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों को एक समय का खाना पार्टी की ओर से दिया जाएगा। नगालैंड की BJP ST मोर्चा द्वारा यह इंतजाम किया जाएगा। प्लान के अनुसार, पहले कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए यह सुविधा होगी बाद में राज्य के अन्य हिस्सों के लिए योजना में विस्तार किया जाएगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वानफोंग कोनयाक ने बताया कि कोहिमा में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए एक समय का भोजन की सुविधा 15 मई से शुरू की जाएगी जो लॉकडाउन के समाप्त होने तक जारी रहेगा।

14 से 21 मई तक लॉकडाउन

उन्होंने बताया ‘राज्य में बढ़ते संक्रमण के मामलों के बीच नगालैंड सरकार ने 14 से 21 मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है। इस प्रोग्राम की शुरुआत कोहिमा की ट्रैफिक पुलिस के साथ की जाएगी। इसके तहत यहां के सफाईकर्मियों व हेल्थवर्करों को शामिल किया जाएगा।’ कोनयाक ने जोर दिया कि कोविड मामलों में बढ़ोतरी के कारण फ्रंटलाइन वर्करों की ड्यूटी बढ़ गई है और इस चुनौतीपूर्ण समय में वे पूरे साहस व लगन के साथ इसे निभा रहे हैं। नगालैंड की भाजपा यूनिट ने अपने वर्करों को सभी संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है ताकि राज्य की जनता को मदद मिल सके।

शिवानी माजिला

विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को नहीं किया जाएगा ऑटो प्रमोट

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कोविड महामारी की वजह से कुमाऊं विवि समेत अन्य विश्वविद्यालयों के किसी भी सेमेस्टर या वार्षिक मोड की कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को अगली क्लास में ऑटो प्रमोट नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस मामले में मीडिया में प्रकाशित व प्रसारित खबरों को गलत करार देते हुए विश्विद्यालयों को परिपत्र जारी किया है। साफ किया है कि 6 मई को यूजीसी की ओर से जारी पत्र में मई माह की ऑफलाइन परिक्षाओं को रोकने के निर्देश दिए गए थे।

यह पत्र कुमाऊं विवि भी पहुंचा है। आयोग की सफाई के बाद कोविड महामारी के बीच बिना पढ़ाई के अगले अगली कक्षा में जाने का सपना पाले हजारों छात्रों को झटका लगा है।

यूजीसी के हवाले से हाल ही में जारी खबरों में कहा गया था कि फाइनल ईयर या सेमेस्टर को छोड़कर अन्य कक्षाओं के छात्रों को ऑटो प्रमोट कर दिया जाएगा। 11 मई मंगलवार को यूजीसी की ओर से सचिव प्रो रजनीश जैन का पत्र वेबसाइट में जारी करने के साथ ही विश्वविद्यालयों को भेजा गया है। कुमाऊं विवि के वरिष्ठ प्रोफेसर के मुताबिक यह पत्र मिल गया है।

यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने बताया कि यूजीसी ने पिछले साल समय-समय पर परीक्षा और शैक्षणिक कैलेंडर पर दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके अलावा, 6 मई, 2021 को यूजीसी के पत्र में विश्वविद्यालयों से अनुरोध किया गया है कि वे मई, 2021 के महीने में ऑफ़लाइन परीक्षाओं को रोककर रखें। प्रिंट और डिजिटल मीडिया में प्रसारित होने वाली खबरों के मद्देनजर, यह स्पष्ट किया गया है कि यूजीसी ने हाल ही में परीक्षाओं पर कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया है और यह खबर गलत है।

मानवी कुकशाल

अपनी नाकामी के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना बंद करे भाजपा

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अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी नाकामी के लिए विपक्ष को ज़िम्मेदार ठहराना बंद करके ऑक्सीजन, बेड, दवाई का इंतज़ाम करे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोरोना के कारण देश भर में हो रही मौतों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी नाकामी के लिए विपक्ष को ज़िम्मेदार ठहराना बंद करके ऑक्सीजन, बेड, दवाई का इंतज़ाम करे।

अगर सपा के समय बनी स्वास्थ्य व अन्य संरचनाओं का सदुपयोग सरकार करे तो प्रदेशवासियों की जान बचाई जा सकती है।
अहंकारी भाजपा राजनीतिक दोषारोपण की जगह जनहित में काम करे।

प्रदेश की भाजपा सरकार अपनी नाकामी के लिए विपक्ष को ज़िम्मेदार ठहराना बंद करके ऑक्सीजन, बेड, दवाई का इंतज़ाम करे। अगर सपा के समय बनी स्वास्थ्य व अन्य संरचनाओं का सदुपयोग सरकार करे तो प्रदेशवासियों की जान बचाई जा सकती है।

अहंकारी भाजपा राजनीतिक दोषारोपण की जगह जनहित में काम करे
बता दें कि कोरोना के कारण प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों से मौत की खबरें आ रही हैं। वहीं, विश्व मीडिया में भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मीना छेत्री

सोनू सूद ने मंगवाए फ्रांस से आक्सीजन प्लांट्स जल्द ही पहुंचेंगे भारत

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बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद कोरोना काल में गरीबों और जरूरतमंदों का सहारा बन चुके हैं। साल 2020 से वो कोरोना से परेशान लोगों की मदद कर रहे हैं और अभी तक उनकी मदद का सिलसिला जारी है। इन दिनों देश में कोरोना की दूसरी लहर परेशानी का सबब बनी हुई है। ऐसे में सोनू सूद ने लोगों की जान बचाने के लिए फ्रांस से ऑक्सीजन प्लांट्स मंगवाए हैं। इससे पहले वो चीन की मदद से भारत तक ऑक्सीजन कंसनट्रेटर्स भी मंगवा चुके हैं। इस कदम से एक बार फिर सोनू सूद ने साबित कर दिया है कि वो देश के लोगों को कुछ नहीं होने देंगे।

सोनू सूद ने एक स्टेटमेंट जारी कर इस बारे में जानकारी दी। सोनू सूद ने कहा कि,’देश में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए कई सारे ऑक्सीजन प्लांट्स मंगाए गए हैं। इससे देशभर में जो भी ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है उससे राहत मिल जाएगी। सब कुछ समय से हो जाएगा’।

सोनू ने आगे कहा कि, ‘हम देख रहे हैं कि कई सारे लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर्स के अभाव के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन ऑक्सीजन सिलेंडर्स को ऐसे ही अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जाएगा बल्कि इसे पूरी तरह से भरकर दिया जाएगा। इस समय सबसे ज्यादा जरूरी है कि चीजों को सही समय पर किया जाए ताकी हम ज्यादा लोगों को ना खोएं’।

आपको बता दिया जाए कि पहले प्लांट का ऑर्डर दिया जा चुका है और ये 10-12 दिन में फ्रांस से आ जाएगा। सोनू सूद के इस नेक कदम की एक बार फिर तारीफ हो रही है। इस बार भी सोनू सूद पूरी तरह से सक्रिय हैं और मदद मांग रहे एक एक व्यक्ति की वो सहायता कर रहे हैं।

मानवी कुकशाल