जल-जीवन योजना के टारगेट में एक बार फिर हुआ बदलाव

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जल जीवन योजना के टारगेट में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं। एक बार फिर इस योजना का टारगेट बदलकर दिसंबर 2022 कर दिया गया है। इसके तहत नवंबर तक इसकी टेंडर प्रक्रिया भरने का काम भी अफसरों को सौंप दिया गया है।

इससे पूर्व इस योजना का टारगेट 2020 व इसके बाद 2021 कर दिया गया था। इसी दौरान कईं घरों में तेजी से सूखे नलों की दिक्कतों के मामले सामने आने लगे। इसके बाद कुछ घरों में ऐसे कनेक्शन मिले जिनमें पानी ही नहीं पहुंचा। ऐसे लगातार मामले आने के बाद कहा गया कि योजना का लक्ष्य साल 2024 तक है।

हर घर तक पानी 2024 तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन योजना को एक बार फिर बदल दिया गया इसके तहत अब हर घर पानी 2022 तक पहुंचाएं जाने का लक्ष्य है। अभी भी आठ लाख घरों तक पानी पहुंचाया जाना बाकी है । प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के 15.18 लाख घरों में से 7.05 लाख घरों को नलों से जोड़े जाने का कार्य हो चुका है।

शहरी क्षेत्रों में 11.65 लाख घरों के विपरीत 5.58 लाख घरों को पेयजल योजना से जोड़ा गया है। और शहरी क्षेत्रों में 11.65 घरों के विपरीत 3.26 लाख घरों को सीवरेज से जोड़ दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में 55 लीटर व शहरी क्षेत्रो में 135 लीटर पानी प्रत्येक घर में उपलब्ध कराए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

प्रिया जायसवाल

 

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उत्तर प्रदेश में मंतातरण बढ़ाने के लिए विदेश से फंडिग

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उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर मतांरण की परत दर खुलने के दौरान ही इसमें विदेशों से भी बड़ी मात्रा में धन मिलने का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश में मतांतरण के मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार करने वाली एटीएस की चार्ज शीट में मतांतरण के लिए विदेशों से फंडिंग का पता चला है।

उत्तर प्रदेश में महानगर के साथ ही छौटे शहर व कस्बों में बड़े पैमाने पर मतांतरण की जांच कर रही उत्तर प्रदेश एटीएस को इस खेल में मतांतरण के सिंडिकेट के खातों की पड़ताल में खाड़ी देशों के साथ अमेरिका व ग्रेट ब्रिटेन से भी फंडिंग का पता चला है।

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उत्तर प्रदेश एटीएस ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें दर्शाया गया है कि इनके खातों में विदेशी संस्थाओं से करीब 150 करोड़ की फंडिंग हुई है। उमर गौतम की संस्था को ब्रिटेन के अल फला ट्रस्ट से 57 करोड़ रुपया मिला है।

इस खेल को बढ़ाने के लिए इनको दुबई के साथ खाड़ी के अन्य देशों से फंड मिल रहा था।

 

 शिवानी चौधरी

गोरखपुर में लाखों लोगों को राहत देने के लिए बदलेगा महायोजना

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गोरखपुर विकास प्राधिकरण में महायोजना 2031 को तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नियोजन विभाग द्वारा इस महायोजना का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। नवंबर महीने में इसे आपत्तियों के लिए प्रकाशित भी किया जा सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी साल महायोजना 2031 को लागू कर दिया जाएगा। नई महायोजना लागू होने से जिले के बड़े क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा। कई स्थानों के भू उपयोग बदल सकेंगे।

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महायोजना 2031 को अगले 10 साल के लिए तैयार किया जा रहा है। इस महायोजना के बाद कई पुरानी समस्याओं का निराकरण होने की उम्मीद जतायी जा रही है। वर्तमान महायोजना में कई क्षेत्रों में सड़क आदि का प्रस्ताव था। वहां का भू उपयोग आवासीय होने के कारण कई लोगों ने मकान बनवाना शुरू कर दिया है लेकिन उस क्षेत्र में सड़क का प्रावधान होने के कारण उनके मानचित्र पास नहीं हो पा रहे हैं।

 

शिवानी चौधरी

अधिकारीयों पर सख्त हुए सीएम योगी आदित्यनाथ

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पांच दिन के दौरे पर बीती 12 अक्टूबर को गोरखपुर पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने अंतिम दिन शनिवार को गोरखनाथ मंदिर के हिंदू सेवाश्रम मे जनता दर्शन किया। इस दौरान उन्होंने 200 से अधिक लोगों के दर्द को सुना और उसके समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान वह अधिकारियों को भी इस बाबत निर्देश भी देते रहे। कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

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सुबह से ही लग गई फरियादियों की भीड़

नवरात्र और विजयादशमी के परंपरागत आयोजनों में व्यस्त होने के चलते मंदिर में रहने के बावजूद मुख्यमंत्री बीते तीन दिन से जनता दर्शन नहीं कर पा रहे थे । हांलाकि लोग आकर निराश न लौटें, इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दे रखा था। ऐसे मे जनता दर्शन के लिए हिंदू सेवाश्रम में अधिकारी प्रतिदिन निर्धारित समय पर मौजूद रहते थे। शुक्रवार को जैसे ही मुख्यमंत्री आनुष्ठानिक कार्यक्रमों से निवृत्त हुए, शनिवार की सुबह ही जनता दर्शन को पहुंच गए।

 

   शिवानी चौधरी

 

 

 

पहले कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे सीएम

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उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को जन विकार सहकारी समिति के तहत पहल कार्यक्रय का मुख्य अतिथि के तौर पर शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

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इस समिति के अध्यक्षव संजय उनियाल के कहा कि इस कार्यक्रम में उतराखंड के गावों से लघु एवं कुटीर उघोग से जुड़े हुए लोग शामिल होंगे। साथ ही उन्होंने ये भी कहा की इस कार्यक्रम मे उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जो अपने क्षेत्रों मे लघु और कुटीर उघोगों से जुड़े हुए क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे है। इसके साथ ही संजय उनियाल ने कहा की इस अभियान की शुरुआत उतराखंड को और भी बेहतरीन बनाने के लिए की जा रही है। साथ ही उतराखंड के सभी गावों के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है। और सभी लोगों तक रोजगार जैसी सुविधाये पहुंचाना भी इस कार्यक्रम का उदेश्य रहेगा।

 

खाध पदार्थो में पोषण का सतुंलन बेहद जरूरी

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 स्वस्थ तन और मन के लिए सेहतमंद खाना बेहद जरूरी है, लेकिन लगातार भागदौड़ भरी होती हमारी जिंदगी में खानपान का तानाबाना ही सबसे ज्यादा बिगड़ रहा है। खानपान की इसी महत्ता को दर्शाने के लिए हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से मानव जीवन में खाद्य की महत्व और उससे जुड़ी जागरूकता का प्रसार किया जाता है।

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समय के साथ हमारे खानपान के समीकरण कई पैमानों पर बिगड़े हैं। इस विषय में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के फिजियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर नरसिंह वर्मा कहते हैं कि अतीत में जहां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बेहतर होती थी और खानपान का समय भी निश्चित था तो इंसानी सेहत अमूमन काबू में रहती थी। वक्त के साथ आए बदलाव ने न केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को प्रभावित किया है, बल्कि अनियमित जीवनशैली के चलते उनसे अपेक्षित पोषण तक नहीं मिल पाता।

 

  शिवानी चौधरी

कौन है पुंछ में आतंकीयों का मददगार

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जम्मु कश्मीर के पुंछ और राजोरी में आतंकवादीयों के होने की सुचना के बाद से इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गय़ा है। साथ ही खुफिया एजेंसियों और सुरक्षाबलों को भी बेहद सर्तक रहने को कहा गया है। डेरा के घने जंगलो में सुरक्षाबलों द्वारा आतंकवादीयों के खिलाफ अभियान चलाने को दौरान ये अलर्ट जारी किया गया। साथ ही बताया गया है कि इलाके कि सुरक्षा को हाई अलर्ट पर कर दिया गया है। साथ ही आतंकियों की तलाशी भी बड़े पैमाने पर कि जा रही है। हालांकि आतंकी समुह को लेकर अभी तक कोई भी जानकारी साफ नहीं हो पा रही है।

सुरक्षाबलों की ओऱ से तलाशी जारी है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आतंकवादीयों ने दो अलग-अलग स्थानों पर अपना डेरा बनाया हुआ है।  आतंकवादीयों के हमले से अभी तक एक जेसीयों समेत सेना के सात जवान शहीद हो चुके है।

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आतंकवादीयों द्वारा किये गये हमलों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है, इन आतंकवादीयों के क्या पुंछ में कोई मददगार है औऱ इनके लिए खाना कहां से आ रहा है। कहा जा रहा हा कि बिना स्थानीय सहयोग के ऐसा कैसे संभव है। हालांकि सुरक्षाबलों की ओर से तलाशी अभियान जारी है।