ऋषिकेश नगर निगम: भूमाफियाओं के कब्जे में करोड़ों की सरकारी संपत्तियां, सर्वे में खुलासा

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-भूमाफियाओं के कब्जे में करोड़ों की सरकारी संपत्तियां, सर्वे में खुलासा

-चर, शौचालय, चुंगी और पार्क तक का नामोनिशान मिटाया

-सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कहीं दुकान तो कहीं व्यावसायिक भवन बना दिये गए
“जमीन बेंच देंगे गगन बेंच देंगे, कलम के सिपाही अगर सो गए तो वतन के सिपाही वतन बेंच देंगे”। दिवंगत शायर अदम गोंडवी ने जो आशंका वर्षों पहले जाहिर की थी वो ऋषिकेश में आज डरावने हकीकत के रूप में दरपेश दिखाई दे रही है। यहां न सिर्फ शासनादेशों की धज्जियां उड़ाई गईं बल्कि सरकारी संपत्तियों को लूटने है लिए ढिठाई से छोड़ दिया गया। आज के हालात ये हैं कि निगम सीमा स्थित करोड़ों की बेशकीमती अचल संपत्तियों पर भूमाफियाओं ने अपनी निजी मीनार खड़ी कर ली है। काफी तो ऐसी भी सरकारी जमीनें हैं जिन्हें नटवरलालों ने एक से अधिक बार बेचकर मुनाफा भी समेट लिया। पहले नगर पालिका और अब नगर निगम के अफसरों ने इस अराजकता पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। फिलहाल अब औपचारिकता में लुट चुकी निगम की संपत्तियों का सर्वे हो रहा है। नतीजा ये है कि 70 से अधिक सरकारी संपत्तियों में से महज 7 की अवैध कब्जे की शिनाख्त हो पाई है। इनमें से अधिकांश पर दुकानें या फिर काम्प्लेक्स और आवास का निर्माण हो चुका है।

ऋषिकेश में सरकारी संपत्तियों पर कब्जे की शुरुआत 1994 से ही शुरू हो गई थी। उस दौरान उत्तराखण्ड अलग राज्य नहीं बना था। 1994 में तत्कालीन नगर विकास सचिव आरबी भाष्कर ने शासनादेश जारी कर निर्देश दिए थे कि निकाय की जो संपत्तियां अनुपयोगी हैं उन्हें बेचकर या फिर किराये पर देकर राजकोष की आय का जरिया बनाया जाए। इस शासनादेश पर तो अमल नहीं हो पाया बल्कि जिम्मेदारों ने निजी आय का रास्ता जरूर खोल लिया। अंधाधुंध तरीके से भूमाफियाओं को सरकारी संपत्तियों पर कब्जे की छूट दे दी गई।

इसके अलावा आश्रमों सहित दुकानों पर अवैध कब्जे की मौन सहमति दे दी गई। नतीजा ये हुआ कि जहां शौचालय, चुंगी, चर, पार्क जैसी सुविधाओं के लिए जमीन छोड़ी गई थीं, उन पर आज मीना बाजार या फिर ऐशगाह अवैध रूप से बन चुके हैं। हद तो तब हो गई जब देहरादून रोड से लेकर हरिद्वार मार्ग तक निगम की संपत्तियों को भूमाफियाओं ने स्वयम्भू मालिक बनकर कई बार बेंचा और रकम ऐंठ ली। इस अंधेरगर्दी पर जिम्मेदार अफसरों का रवैया भी कम खेदजनक नहीं है। अरसे बाद एक शिकायत पर निगम प्रशासन अपनी संपत्तियों का सर्वे कराने में जुटा है।

कई महीनों की खाक छानने के बाद करीब 7 सम्पत्तियों की पहचान हो पाई है। ये अवैध कब्जे रेलवे रोड, देहरादून रोड, चंद्रेश्वरनगर, हरिद्वार मार्ग पर मिले हैं। पशोपेश ये है कि पहचान हो जाने के बाद भी निगम प्रशासन कुछ ठोस करने की स्थिति में नहीं है। हालत ये है कि जहां शौचालय थे वहां कॉम्पेक्स बनाकर भूमाफिया किराया वसूल रहे हैं। चुंगी स्थल पर दुकानें बनाकर बेच दी गई हैं। लिहाज़ा जो ठग कौड़ियों के मोहताज हुआ करते थे अब वे रियालस्टेट एम्पायर के मालिक बन चुके हैं। अधिकारी कुछ दूर नियमों की पटरी पर फर्राटा भरते हैं तो उच्च सिफारिशें उन्हें बेदम कर देती हैं। थकहार कर अब अफसर सरकारी सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे का सर्वे महज़ मौका मुआयना और नपाई में समेट रहे हैं। सियासी दखल और धांधलेबाजी से आजिज अफसर अब निगम में बस समय काट रहे हैं।

सालाना बजट से कई गुना अर्जित हो सकती है आय

निगम अक्सर बजट का रोना रोता है। असलियत ये है कि यदि निगम अपनी ही लुटी सम्पत्तियों को वापस हासिल करने में सफल हो जाए तो करोड़ो की आय हो सकती है। कड़वा सच तो ये है कि ऊपरी दबाव और रसूखदार भूमाफियाओं के अनर्गल दखल से निगम के अफसर ही सरकारी सम्पत्तियों को वापस पाने आस लगभग छोड़ चुके हैं।

मजबूरी का सर्वे

वर्षों से जिस अहम पहलू पर किसी की नज़र ही नहीं गई उस अहम घपले का सर्वे शुरू करना भी चौकाने वाला है। सरकारी सम्पत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का प्रस्ताव पूर्व में अंदरखाने कई बार रखा गया। इसके बावजूद कोई भी अफसर घपले के इस छत्ते में हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। हाल ही में पूर्व मनोनीत पार्षद प्रमोद शर्मा ने कई अवैध कब्जों की सूची के साथ मामले की जांच की मांग कर डाली। इसके बाद कुछ हलचल शुरू हुई है। पूर्व पार्षद प्रमोद शर्मा के मुताबिक उन्होंने ज्ञापन नगर आयुक्त को सौंपा था। कई महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें ताज़ा प्रगति से अवगत नहीं कराया गया। प्रमोद शर्मा का कहना है कि जब भी जांच के बारे में पूछा जाता है तो टरकाने की कोशिश होती है।

मुद्दे से भटकाने के लिए कहा जाता है कि आश्रमों पर अवैध कब्जे की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। सच ये है कि आश्रमों और निगम की 70 से ज्यादा सम्पत्तियों पर कब्जे के मामले अलग अलग हैं। प्रमोद शर्मा का आरोप है कि निगम घपलों के दलदल में गले तक डूब चुका है। इसकी जांच के लिए शासन स्तर पर विशेष ऑडिट टीम गठित होनी चाहिए।

क्या है आश्रमों पर अवैध कब्जे का मसला

ऋषिकेश में आश्रमों पर अवैध कब्जे का भी मामला नया नहीं है। जिन भामाशाहों ने अपनी संपत्ति निगम को दान की थी उन्होंने ट्रस्ट डीड के माध्यम से उपयोग और संचालन की शर्तें भी जोड़ी थीं। इसके बावजूद भूमाफियाओं और अफसरों के गठजोड़ ने आश्रमों के मकसद को ही दरकिनार कर दिया। अधिकांश आश्रम यात्रियों के रैनबसेरे, कन्या विद्यालय और अस्पताल के मकसद से दान किये गए थे। आज हालात ये हैं कि पट्टे और किराएदारी के नाम पर ठगमण्डली ने अवैध कब्जा कर लिया है। किसी ने सिकमी किरायेदार रख लिए तो किसी ने आश्रमो में दुकान खोल ली है। यहां तक कि कुएं भी गायब कर दिए गए हैं। मजे की बात तो ये कि निगम के जिस कर्मचारी पर अवैध रूप से दुकान आवंटित करने का आरोप है उसे ही एसआईटी का हिस्सा बना दिया गया है।

फिलहाल एसआईटी जांच में बमुश्किल पांच आश्रम ऐसे पाए गए हैं जिनका मानकों के अनुरूप उपयोग नहीं हो रहा है। इनमें जानकी माई धर्मशाला, भूरी माई संस्था की दो धर्मशालाएं, चंद्रेश्वर नगर स्थित और पुराना बस अड्डा स्थित धर्मशाला शामिल हैं। इनमें से फिलहाल पुराना बस अड्डा स्थित धर्मशाला को निगम में शामिल करने की कवायद शुरू है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर निगम के एक अफसर का कहना है कि दबाव के कारण काम करना मुश्किल हो रहा है। फर्जीवाड़े को दबाने के लिए अक्सर सिफारिश झेलना पड़ता है। असलियत ये है कि निगम का सालाना बजट करीब 12 करोड़ का है। यदि अवैध कब्जे में पड़ी सम्पत्तियों को मुक्त करवा लिया जाए तो इससे कहीं ज्यादा आय किराया वसूली से हो सकती है।

पार्किंग स्थल पर भी पचड़ा

जमीनों पर मालिकाना हक का जितना घना मकड़जाल ऋषिकेश में है, शायद पूरे प्रदेश में नहीं होगा। ताज़ा मामला निगम के सामने संभावित पार्किंग स्थल से जुड़ा है। यहां करीब 4 सौ गज भूमि पर पार्किग और स्टाफ क्वार्टर बनाने की योजना है। लफड़ा ये है कि शहर का एक प्रभावशाली परिवार इस भूमि पर अपना हक जताता रहा है। इसमें से कुछ भूमि उक्त परिवार ने बेच भी दी है। जबकि निगम का तर्क है कि उक्त चिन्हित भूमि सरकारी है। फिलहाल कोविड के चलते ये दावेदारी शिथिल पड़ी है।

संभावना है कि आने वाले समय मे इस मुद्दे पर भी कानूनबाज़ी जमकर होगी। गौरतलब है कि इन्हीं दोनों पक्षों में पुराना बस अड्डा भूमि की मिल्कियत को लेकर भी विवाद हुआ था। उस दौरान मेयर ने पत्र लिख विकास प्राधिकरण को नक्शा मंजूर करने पर आपत्ति जता दी थी। बाद में हैरतअंगेज तरीके से नक्शा भी पास हो गया और निगम की आपत्तियां भी हवा हो गईं। अब तक लोग इस समझौते की डील पर तरह तरह की कयासबाजी कर रहे हैं।

 

यह भी पढ़े- ऋषिकेश में रक्तदान शिविर में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं

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सीएम ने निर्माण कार्यों में देरी करने पर दी कार्रवाई की चेतावनी

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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत रविवार को राजकीय दून मेडिकल कालेज में औचक निरीक्षण को पहुंच गए। यहां उन्होंने अस्पताल के नए ओपीडी भवन में चल रहे निर्माण कार्य लंबे समय से पूरे नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए समय पर सभी कार्य पूरे करवाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत दून मेडिकल कालेज अस्पताल के निरीक्षण को पहुंचे तो अधिकारी और स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। मुख्यमंत्री सीधा नई ओपीडी पहुंचे, यहां उन्होंने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने ओपीडी बिल्डिंग और आपरेशन थिएटर बिल्डिंग का कार्य समय पर पूरा न होने को लेकर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द निर्माण कार्यों को पूरा करें। ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी न हो। कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।मुख्यमंत्री ने कोरोना और अन्य बीमारियों के मरीजों के इलाज में जुटे डाक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य की सराहना करते हुए उनकी पीठ भी थपथपाई। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डा. केसी पंत, निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार भी मौजूद रहे।

-मानवी कुकशाल

उत्तराखंड में 22 जून तक बढ़ा कोविड कर्फ्यू, तीन जिलों के लिए खोली गई चारधाम यात्रा

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कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी के बावजूद सरकार ने प्रदेश में लागू कोविड कर्फ्यू की अवधि एक हफ्ते यानी 22 जून तक बढ़ा दिया है। साथ ही 15 जून से चारधाम यात्रा को भी तीन जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्‍तरकाशी के लोगों के लिए खोल दिया है। इसके लिए आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य की गई। वहीं, अन्य राज्यों से उत्‍तराखंड आने वालों के लिए आरटी पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अभी भी अनिवार्य है। कोविड कर्फ्यू में वर्तमान व्यवस्था में कुछ और रियायत भी दी। हफ्ते में तीन दिन बाजार खुलेंगे। मिठाई की दुकानें पांच दिन खुलेंगी। शहरों में विक्रम, ऑटो के संचालन की अनुमति दी गई। साथ ही राजस्व न्यायालय खोलने का भी निर्णय लिया गया है।

-मानवी कुकशाल

देहरादून में सिमकार्ड की KYC करने के नाम पर ठगे 50 हज़ार रुपए

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सिमकार्ड की केवाइसी करवाने के नाम पर साइबर ठग ने एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये की ठगी कर ली। इंद्रानगर निवासी भारत भूषण भट्ट ने पुलिस को बताया कि अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन कर कहा कि आपका सिमकार्ड 24 घंटे में बंद हो जाएगा। सिम को चालू रखने के लिए केवाइसी करवानी पड़ेगी। इसके लिए ठग ने क्विक सपोर्ट एप डाउनलोड कर डेविट कार्ड से 10 रुपये का रिचार्ज करने को कहा। रिचार्ज करते ही खाते से 50 हजार रुपये खाते से साफ हो गए। इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।साइबर ठगी के एक अन्य मामले में सुनील चंद्र जखमोला निवासी बंजारावाला ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून को एक प्रार्थना पत्र भेजा। सुनील चंद्र ने बताया कि उनको अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को टेलीकाम कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए सिमकार्ड बंद होने की बात कही। साइबर ठग ने केवाइसी एप डाउनलोड करने की बात कही और खाते की जानकारी हासिल करते हुए 69 हजार रुपये उड़ा दिए।

-मानवी कुकशाल

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस तैयारी

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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने हर मोर्चे पर तैयारी शुरू कर दी है। अलग-अलग जाति और धर्म के लोगों को साधने के लिए कांग्रेस ने अलग-अलग प्लानिंग की है। सूत्रों के मुताबिक, मुसलमानों के बीच पैठ बनाने के लिए कांग्रेस ने मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का सहारा लेने का मन बनाया है। इसके लिए प्रदेश के 2 लाख मदरसों की लिस्ट भी तैयार की गई है।
मदरसों का क्यों सहारा लेना पड़ा ?
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष शहनवाज आलम का कहना है कि पार्टी में मुस्लिमों की उपेक्षा के चलते 1990 के बाद से अल्पसंख्यक वोट खिसककर सपा और बसपा की ओर जाने लगा। लेकिन इन पार्टियों में भी मुस्लिमों को तवज्जो नहीं मिली। यूपी में भी कांग्रेस के पास कोई मजबूत नेतृत्व नहीं था। इसके चलते मुस्लिम वोटर भाजपा के विरोध में सपा और बसपा के साथ जाने को मजबूर रहे जिसका फायदा दोनों पार्टियां उठाती रही। लेकिन अब यूपी कांग्रेस को प्रियंका गांधी के रुप में एक अच्छी लीडरशिप मिली है। इसलिए नए सिरे से मुस्लिमों को कांग्रेस से जोड़ने की कवायद शुरू हो रही है।
सपा के खिलाफ अभियान शुरू किया
शहनवाज बताते हैं कि अल्पसंख्यकों को जोड़ने के लिए एक ‘स्पिकअप माईनॉरिटी’ कैंपन शुरु किया गया है। फेसबुक लाइव के जरिए चलाए जा रहे इस कैंपेन में बताया जा रहा है कि किसी तरह सपा का बीजेपी से अंदरूनी सांठगांठ रहता है। उन्होंने बताया कि हर रविवार होने वाले इस कैंपेन में हम मुलायम सिंह यादव का संसद में दिया बयान भी बताते हैं। मुलायम सिंह ने संसद में कहा था कि नरेंद्र मोदी को ही दोबारा प्रधानमंत्री बनना चाहिए। इससे साफ है कि सपा और BJP में बैक डोर से कोई न कोई समझौता जरूर हुआ है।
मुस्लिम OBC पर सबसे ज्यादा फोकस
शहनवाज के मुताबिक, सूबे में करीब 8-10% यादव हैं, जबकि मुस्लिम OBC की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इसमें खासतौर पर अंसारियों की संख्या ज्यादा है। गोरखपुर में करीब चार लाख, मऊ में करीब साढ़े तीन लाख, बनारस में चार लाख, मुबारकपुर आजमगढ़ में करीब दो लाख, अंबेडकरनगर में करीब चार लाख अंसारी हैं।
कुल मुस्लिम OBC की करीब 60% जनसंख्या अंसारियों की ही है। इन्हें बताया जा रहा है कि आजादी लड़ाई से लेकर अब तक देश में इनकी कितनी अहम भूमिका रही है।
शहनवाज का कहना है कि केवल अंसारियों से तुलना की जाए तो किसी जिले में चार लाख यादव वोटर नहीं मिलेंगे। फिर भी वहां सपा इन्हीं मुस्लिम वोटर्स की बदौलत जीत हासिल करती रही है। अंसारियों के बाद ओबीसी मुस्लिमों की एक और बड़ी आबादी वाले कुरैशियों को भी मजबूती से जोड़ने का अभियान चल रहा है। इसी सिलसिले में मोमिन कॉन्फ्रेंस आंदोलन से जुड़े रहे अब्दुल कय्यूम अंसारी जो कि बुनकरों के बड़े नेता रहे, उनके जन्मदिन पर इस बार कांग्रेस ने कई कार्यक्रम आयोजित किए थे।
शिवानी

भाजयुमो ने सरोना गांव में 105 लोगों को दी कोरोना उपचार किटें

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भाजयुमो की राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी नेहा जोशी के नेतृत्व में कार्यकर्त्‍ताओं ने दूरस्थ गांव सरोना में 105 परिवारों को राशन व सुरक्षा उपकरण प्रदान किए। सेवा ही संगठन अभियान के तहत यह सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य अस्थल, बीर सिंह चौहान, युवा मोर्चा प्रवक्ता व त्रिकोण सोसायटी की अध्यक्ष नेहा शर्मा, प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी शेखर वर्मा ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बीर सिंह चौहान ने कहा कि हर एक भाजपा कार्यकर्त्‍ता निरंतर सेवा कार्यो में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को राशन के साथ ही आयुष किट, मास्क, सैनिटाइजर, इम्यूनिटी बूस्टर सीरप उपलब्ध कराई गई है। इस दौरान नेहा जोशी ने बालाजी इन्वेस्टमेंट के मेंबर अक्षत जैन व इशिता जैन का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान सुंदर सिंह पयाल, ग्राम प्रधान भारती पयाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेश सिंह पयाल आदि उपस्थित रहे।

-मानवी कुकशाल

सीबीएसई ने कक्षा 12 के स्टूडेंट्स के ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 16 जून 2021 को जारी

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सीबीएसई ने कक्षा 12 के स्टूडेंट्स के ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 16 जून 2021 को जारी किये जाएगा। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया निर्धारित करने के लिए बनायी गयी समिति की रिपोर्ट के आधार पर सीबीएसई बोर्ड द्वारा रिजल्ट तैयार करने के मानकों की घोषणा आधिकारिक रूप से की जाएगी।
आज जारी होने की थी संभावना
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12 के स्टूडेंट्स के ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया आज, 14 जून 2021 को जारी किये जाने की संभावनाएं जताई जा रहीं थीं। सीबीएसई 12वीं क्लास ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 के आधार पर केंद्रीय बोर्ड से सम्बद्ध देश भर के स्कूलों में विभिन्न स्ट्रीम में सीनियर सेकेंड्री कक्षाओं के स्टूडेंट्स का शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए मूल्यांकन किया जाना है। सीबीएसई 12वीं ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 के अंतर्गत निर्धारित मानकों के अनुसार स्टूडेंट्स को उनके विभिन्न विषयों के लिए अंक दिये जाने हैं। बता दें कि कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किये जाने के बाद सीबीएसई द्वारा स्टूडेंट्स के मूल्यांकन करने और रिजल्ट तैयार करने के लिए ‘ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया’ निर्धारित करने के लिए एक 13 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति को अपनी रिपोर्ट 10 दिनों में सबमिट करने की जानकारी दी गयी थी।
लगभग 12 लाख स्टूडेंट्स को है इंतजार
सीबीएसई बोर्ड 12वीं ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 का इंतजार देश भर के लगभग 12 लाख छात्र-छात्राएं कर रहे हैं। बिना परीक्षा दिये इंटर्नल एसेसमेंट के आधार पर नतीजे जारी किये जाने की घोषणा के बाद से स्टूडेंट्स में अपने सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2021 को लेकर दुविधा है। कई ऐसे स्टूडेंट्स हैं जिन्हें कक्षा 11 व 12 के यूनिट टेस्ट और टर्म-एग्जाम अच्छे अंक नहीं मिले हैं लेकिन उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपनी तैयारी अच्छी की थी। अब परीक्षाओं के रद्द होने और इंटर्नल एसेसमेंट से रिजल्ट तैयार किये जाने से उन्हें निराशा हाथ लगेगी। हालांकि, सीबीएसई बोर्ड द्वारा ऐसे स्टूडेंट्स के लिए बाद में परीक्षाएं आयोजित करने की घोषणा की गयी है जो कि सीबीएसई 12वीं ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 से अंसतुष्ट होंगे।
दूसरी तरफ, केंद्रीय बोर्ड द्वारा घोषित किये जाने वाले सीबीएसई 12वीं ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 के अनुसार ही कई राज्यों के बोर्ड द्वारा कक्षा 12 के लिए रिजल्ट तैयार किये जाने की घोषणा की गयी है। वहीं, देश भर के दिल्ली विश्वविद्यालय समेत कई अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में यूजी कोर्सेस में दाखिले के लिए उम्मीदवारों का चयन उनके 12वीं के अंकों के आधार पर तैयार की गयी मेरिट के अनुसार किया जाता है। बिना परीक्षा इंटर्नल एसेसमेंट के आधार पर जारी किये जाने की स्थिति में यूजी ऐडमिशन में इस बार भी 12वीं के अंकों के आधार पर होगा या इस बार प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी, इस पर क्लैरिटी अभी होनी बाकी है। फिलहाल इस समय सभी को सीबीएसई बोर्ड 12वीं ईवैल्यूएशन क्राइटेरिया 2021 का इंतजार है।

शिवानी