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जौ सेहत और औषधि का है खजाना,जानें इसके अनेक फायदें 

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प्राचीन काल से जौ का प्रयोग आहार और औषधि के रूप में होता आ रहा है, जिससे शरीर को ऊर्जा और ताकत मिलती है।

जौ का आयुर्वेदिक महत्व

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जौ का पौधा लगभग 60 से 150 सेंटीमीटर ऊंचा होता है, जिसके पत्ते भालाकार और दाने छोटे नुकीले होते हैं।

जौ के पौधे की खास विशेषताएं

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जौ में फॉस्फोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, आयरन और सैलिसिलिक एसिड जैसे तत्व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं।

जौ में पाए जाने वाले पोषक तत्व

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जौ के सत्तू में घी मिलाकर खाने से सर्दी, खांसी और जुकाम में राहत मिलती है तथा शरीर गर्म रहता है।

सर्दी-जुकाम और खांसी में लाभकारी

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मधुमेह के मरीजों के लिए जौ बेहद उपयोगी है। नियमित सेवन से ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।

मधुमेह नियंत्रण में सहायक जौ

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जौ के आटे से बने लेप से जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है।

गठिया और जोड़ों के दर्द में फायदेमंद

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जौ का सत्तू पाचन को बेहतर बनाता है और गैस, अपच तथा पेट दर्द की परेशानी को कम करता है।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है जौ

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जौ, आंवला और शहद का सेवन नियमित रूप से करने से वजन नियंत्रित रहता है और मोटापा कम होता है।

वजन घटाने और मोटापा कम करने में असरदार

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भारत में जौ मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, बिहार, गुजरात और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक मात्रा में उगाया जाता है।

जौ के प्रमुख उत्पादन वाले क्षेत्र