गरुड़ पुराण के अनुसार, इन लोगों को नहीं होना चाहिए अंतिम संस्कार में शामिल

गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार को एक पवित्र कार्य माना गया है, लेकिन कुछ व्यक्तियों को इसमें शामिल होने से मना किया गया है, ताकि उनकी आध्यात्मिक शुद्धता पर असर न हो।

गरुड़ पुराण के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि शोक और नकारात्मक ऊर्जा का असर उनके स्वास्थ्य और गर्भ पर पड़ सकता है।

छोटे बच्चों का मन कोमल होता है, और श्मशान घाट का तनावपूर्ण माहौल उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे डर या ट्रॉमा हो सकता है।

रजस्वला महिलाएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अशुद्ध मानी जाती हैं, और श्मशान का वातावरण उनके शुद्धता या स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

बीमार या शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को श्मशान में न जाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वहां का प्रदूषित वातावरण और तनाव उनकी सेहत को और बिगाड़ सकते हैं।

संन्यासी और ब्राह्मण, जो आध्यात्मिक साधना में लीन रहते हैं, श्मशान जैसी जगहों से दूर रहते हैं, क्योंकि वहां की नकारात्मक ऊर्जा उनकी साधना को प्रभावित कर सकती है।

गरुड़ पुराण में 'श्मशान से दूर रहने वाले लोग' की स्पष्ट लिस्ट नहीं है। यह अधिकतर आधुनिक व्याख्याएं और लोक मान्यताएं हैं, जिनमें थोड़ी विविधता हो सकती है।