10 सेकंड में करें असली-नकली केले की पहचान
सबसे बड़ी पहचान यही है कि अगर केला पूरा पीला है लेकिन उसका डंठल गहरा हरा है तो वह केमिकल से पका हो सकता है.
केमिकल से पके केले असामान्य रूप से बहुत ज्यादा चमकदार और एक ही रंग के दिखाई देते हैं जो कुदरती नहीं लगता।
प्राकृतिक रूप से पके केले पर छोटे छोटे भूरे या काले धब्बे होते हैं जबकि केमिकल वाले केले एकदम साफ और बेदाग दिखते हैं.
कुदरती केले में एक मीठी और सौंधी महक होती है जबकि केमिकल वाले केले में अक्सर कोई खुशबू नहीं होती या गंध अजीब होती है.
असली केला अंदर तक मीठा और नरम होता है लेकिन केमिकल वाला केला ऊपर से पीला होने के बावजूद अंदर से सख्त और फीका निकल सकता है।
बाजार में केले लकड़ी की गर्मी केमिकल घोल या आधुनिक रिपेनिंग चैंबर के जरिए पकाकर बेचे जाते हैं.
केमिकल वाले केले घर लाने के बहुत जल्दी काले पड़ने लगते हैं और अंदर से इनका गूदा अजीब तरह से गलने लगता है.
कार्बाइड जैसे रसायनों से पके फल खाने से पेट में जलन पाचन की समस्या और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं.