इस गांव में देवर-भाभी खेलते है युद्ध जैसी होली
हरियाणा की होली केवल रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ हर गाँव की अपनी अलग और खास परंपरा देखने को मिलती है।
बता दें कि हरियाणा की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है, जिसे 'भाभी-देवर की होली' भी कहा जाता है।
इसमें भाभियाँ कपड़े का कोड़ा बनाकर देवरों को मारती हैं, जबकि देवर रंग डालकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं।
फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम जैसे ब्रज से सटे इलाकों में महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं।
इन क्षेत्रों की होली में पारंपरिक गीत-संगीत और 'रसा-रंग' की गहरी झलक दिखाई देती है।
पानीपत के नौल्था गाँव में युवा बड़े ड्रमों में रंग और पानी भरकर एक-दूसरे पर जमकर बौछार करते हैं।
होली के अगले दिन 'धुलंडी' मनाई जाती है, जो आपसी भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है।
इस दिन पूरे गाँव के लोग बड़े कड़ाहों में रंग भरकर एक साथ होली खेलते हैं।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक 'फाग' गीत गाए जाते हैं, जो उत्सव के उत्साह को दोगुना कर देते हैं।