अक्टूबर में कब है काली पूजा?
कार्तिक अमावस्या की रात मां काली की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।
मां काली को शक्ति, साहस और निडरता की देवी माना जाता है। वे बुराई के विनाश और सुरक्षा का प्रतीक हैं।
कार्तिक माह शुरू हो चुका है। इस पवित्र महीने में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह जैसे कई महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।
काली पूजा को श्याम पूजा भी कहा जाता है। यह मां दुर्गा के उग्र रूप मां काली को समर्पित है।
कार्तिक माह शुरू हो चुका है। इस पवित्र महीने में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह जैसे कई महत्वपूर्ण पर्व आते हैं।
काली पूजा 20 अक्टूबर यानि सोमवार को मनाई जाएगी। और पूजा का शुभ निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 55 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 44 मिनट तक है.
2025 में कब है काली पूजा
मां काली को क्या चढ़ाएं?
परंपरा और मान्यता के अनुसार माँ काली को फल, मिठाई, मछली, मांस और दाल का भोग चढ़ाया जाता है.
गणेश जी, विष्णु जी और मां काली की मूर्तियाँ,धूप-दीप, चावल, चंदन, दरबा घास, तांत्रिक प्रतीक आदि।
पूजा सामग्री में क्या चाहिए?
सच्चे मन से पूजा करें, दीपक और धूप जरूर जलाएं, 'ॐ क्रीं कालीकायै नमः' का मंत्र जाप करें, दान-पुण्य करें, जागरण और भजन करें।
काली पूजा में क्या करें
झगड़ा या गुस्सा न करें, मांस और शराब का सेवन न करें, काले कपड़े न पहनें, बिना स्नान पूजा न करें, झूठ या दिखावा न करें.
काली पूजा में क्या न करें?