काशी की 'रंगभरी' होली
काशी में फाल्गुन शुक्ल एकादशी
(रंगभरी एकादशी) से ही होली के महापर्व की शुरुआत हो जाती है।
यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन महादेव माता गौरा का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे।
धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन महादेव माता गौरा का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे।
बाबा विश्वनाथ और मां गौरा की जल प्रतिमा बाहर से लाकर काशी की संकरी गलियों से मंदिर तक लाई जाती है।
रंगभरी एकादशी पर स्वयं महादेव अपने भक्तों के साथ होली खेलते हैं, जिससे पूरा मंदिर प्रांगण रंगों से सराबोर हो जाता है।
इस बार काशी में ब्रज की टोली द्वारा 'फूलों की होली' का आयोजन किया गया है, जो अद्भुत सांस्कृतिक समन्वय है।
महाशिवरात्रि के बाद से ही काशीवासी इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं और पूरा शहर शिवमय हो जाता है।