मार्गशीर्ष मास में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी!  जानें क्या करें और क्या न करें

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास (अगहन माह) अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है।

इस वर्ष मार्गशीर्ष मास 6 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर (गुरुवार) तक रहेगा। यह पूरा महीना भक्ति, दान और साधना का उत्तम समय माना जाता है।

मार्गशीर्ष कब से कब तक है?

मार्गशीर्ष मास में ब्रह्ममुहूर्त में उठना शुभ होता है। ताजे पानी या गंगाजल से स्नान करें, फिर शांत मन से भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।

सूर्योदय से पहले उठें

स्नान के बाद 5–10 मिनट 'ॐ श्रीकृष्णाय नमः' या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।' इससे मन शांत होता है और दिन मंगलमय बनता है।

मंत्र जप करें

घर में तुलसी के पौधे में प्रतिदिन जल अर्पित करें। सुबह या शाम दीप जलाएं और प्रार्थना करें, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

 तुलसी पूजन का महत्व

इस महीने में दान का विशेष पुण्य मिलता है। किसी भूखे को भोजन कराएं या अनाज, वस्त्र, दाल-चावल दान करें।

जरूरतमंदों को दान करें

घर में तुलसी के पौधे में प्रतिदिन जल अर्पित करें। सुबह या शाम दीप जलाएं और प्रार्थना करें, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

 तुलसी पूजन का महत्व

मार्गशीर्ष में श्रीमद्भगवद् गीता का पाठ या श्रवण अवश्य करें। पूरी गीता न पढ़ सकें तो रोज एक अध्याय या कुछ श्लोक पढ़ें। 

गीता पाठ का पुण्य

इन गलतियों से बचें

जीरे का सेवन न करें, झूठ, छल, कपट, आलस्य और अपशब्दों से दूर रहें, माता-पिता, गुरु और वरिष्ठों का सम्मान करें, किसी का दिल न दुखाएं