चंद्र ग्रहण लगने पर गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां
इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। माना जाता है कि यह समय गर्भवती महिलाओं के लिए अशुभ होता है।
दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक ग्रहण रहेगा। सूतक काल शुरू होते ही गर्भवती महिलाओं को विशेष नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए।
मान्यता है कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी भी नुकीली या धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। काटना, सिलाई या बुनाई करना वर्जित माना जाता है।
ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे घर के अंदर ही रहें और सीधे चंद्रमा को देखने की गलती न करें।
मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भोजन और पानी 'अशुद्ध' हो जाते हैं। यदि बहुत जरूरी हो, तो पहले से रखे भोजन या पानी में तुलसी के पत्ते डाल दें, ताकि उन पर ग्रहण का असर न हो।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण के समय सोना अशुभ माना जाता है। इस दौरान बैठकर भगवान का नाम लेना या मंत्रों का मानसिक जाप करना बच्चे के लिए अच्छा माना जाता है।
नकारात्मकता को दूर रखने के लिए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। सकारात्मक विचार बनाए रखना मां और बच्चे दोनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
एक पुरानी मान्यता है कि गर्भवती महिला अपनी लंबाई के बराबर एक धागा नापकर दीवार पर सीधा लटका दे या सुरक्षित रख ले। ग्रहण खत्म होने के बाद इसे जल में प्रवाहित कर दें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद गर्भवती महिला को गंगाजल से स्नान करना चाहिए। साथ ही बाद में सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, चीनी) का दान करना शुभ माना जाता है।