आधी रात को क्यों खुल जाती है नींद?

कामयाबी के साथ अक्सर सामाजिक दबाव और तनाव बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर हमारी नींद पर पड़ता है।

तनाव के कारण रात में बार-बार नींद का खुलना आजकल एक गंभीर समस्या बन गई है।

जब हम ज्यादा चिंता करते हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ जाता है, जो दिमाग को शांत नहीं होने देता।

कमर दर्द, गैस (एसिड रिफ्लक्स) या बार-बार यूरिन आना भी गहरी नींद में बाधा डालते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ नींद स्वाभाविक रूप से हल्की हो जाती है, इसलिए शरीर को और अधिक अनुशासन की जरूरत होती है।

महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले बदलाव भी रात की बेचैनी का बड़ा कारण बनते हैं।

सोने से कम से कम आधा घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप छोड़ दें, ताकि नींद लाने वाला 'मेलाटोनिन' हार्मोन बन सके।

बेडरूम में अंधेरा, शांति और हल्का ठंडा तापमान रखने से नींद की क्वालिटी सुधरती है।

रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें और दोपहर में लंबी नींद लेने से बचें।