प्राचीन समय में भारत को “सोंने की चिड़िया” क्यों कहा
जाता था? यहां जानें.
भारत को सोने की चिड़िया इसलिए कहा जाता था...क्योकिं यह सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि समृद्धि, संस्कृति और व्यापार का प्रतीक था।
भारत में सोने, चांदी, हीरे-मोती, लोहा और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे।
भारत में सोने, चांदी, हीरे-मोती, लोहा और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे।
मौर्य, गुप्त और मुग़ल साम्राज्य में राजाओं का वैभव और भव्यता दुनिया में प्रसिद्ध थी।
गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां उपजाऊ घाटियां बनाती थीं। चावल, गेहूं और मसाले की खेती बहुत फलदायक थी, जिससे कृषि व्यापार मजबूत हुआ।
भारत के मसाले, रेशमी कपड़े, गहने और हाथ के बने सामान विदेशों में बहुत
मूल्यवान थे।
भारत के मंदिर, महलों, मूर्तियों और चित्रकला ने इसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया।
हेरोडोट, प्लिनी और मरिकस जैसे विदेशी यात्रियों ने भारत की समृद्धि, व्यापार और संस्कृति देखकर इसे दुनिया की सबसे अमीर भूमि बताया।
भारत में प्राचीन समय में सोने की कई खानें थीं। विशेषकर दक्षिण भारत और कर्नाटक में सोने की आपूर्ति होती थी।
समृद्धि, व्यापार और सांस्कृतिक वैभव के कारण भारत को विदेशी लोग “सोंने की चिड़िया”
कहते थे।