उत्तराखंड में दो व तीन सूत्रीय मांगो की बाढ़
उत्तराखंड में शिक्षक संघ की दो व तीन सूत्रीय मांगो को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन जारी है। स्थिति यह है कि स्कूलों पर ताले लटके हैं और शिक्षक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में चंपावत जिले में राजकीय शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षकों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया, जिसके चलते जिले के अधिकांश स्कूलों में ताले लटके रहे और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई। छात्र विद्यालय तो पहुंचे, लेकिन शिक्षक न मिलने से पढ़ाई ठप रही, जिससे बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी परेशान दिखे। शिक्षक संघ की प्रमुख मांगों में सीधे प्रधानाचार्य भर्ती पर रोक, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति और लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों का तबादला शामिल है। जिला अध्यक्ष जगदीश सिंह अधिकारी और ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद सिंह मेहता के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन को 27 अगस्त को जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय चंपावत और 2 सितंबर को देहरादून निदेशालय तक ले जाने की चेतावनी दी गई है।
शिक्षक संघ के धरना-प्रदर्शन से छात्रों-अभिभावकों की बढ़ी परेशानी
उत्तराखंड में चंपावत और नरेंद्रनगर में रा0 शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षकों के धरना-प्रदर्शन से स्कूलों में ताले लटके रहे, छात्रों को पढ़ाई से वंचित होना पड़ा जबकि अभिभावक भी परेशान दिखे। नरेंद्रनगर में राजकीय शिक्षक संघ ब्लॉक शाखा ने सोमवार को दो सूत्री मांगों को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विशाल धरना-प्रदर्शन किया। प्रांतीय संगठन के आव्हान पर ब्लॉक के दूरस्थ क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रदर्शन में भाग लिया और 2018 से लंबित मांगों के समाधान न होने पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन का नेतृत्व ब्लॉक अध्यक्ष अनिल कुकरेती, मंत्री संजय मंमगाईं, संरक्षक बर्फ सिंह रावत, रिंकी पंवार, सीमा मल्होत्रा, डॉ. संध्या पंवार और सुधाकांत गैरोला ने किया। शिक्षकों की प्रमुख मांगों में प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती निरस्त कर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति और एलटी से प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य पदों पर लंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया तत्काल शुरू करना शामिल है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर तुरंत आदेश जारी नहीं किए तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि मांगें पूरी होने से शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटेगी और वे मनोयोग से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

