Badrinath-Kedarnath

सावधान! Badrinath-Kedarnath में अब बदल गए एंट्री के नियम

Badrinath-Kedarnath: उत्तराखंड की देवभूमि से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता हेमंत द्विवेदी ने एक बड़ा और बड़ा फैसला लेने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा।

मंदिर समिति की अगली बैठक में पारित होगा प्रस्ताव

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण निर्णय को कानूनी और औपचारिक रूप देने के लिए मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव लाया जाएगा। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद, धामों की मर्यादा और परंपरा को बनाए रखने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। द्विवेदी का कहना है कि यह कदम देवभूमि की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए उठाया जा रहा है।

परंपराओं की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

BKTC अध्यक्ष के अनुसार, केदार खंड से लेकर मानस खंड तक फैले उत्तराखंड के मंदिरों में परंपरागत रूप से केवल हिंदू श्रद्धालुओं के प्रवेश की ही मान्यता रही है। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि गैर-भाजपा सरकारों के कार्यकाल में इन पवित्र परंपराओं की अनदेखी की गई और इनका उल्लंघन होता रहा। हेमंत द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि इन परंपराओं का विधिवत पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि धामों की पवित्रता बनी रहे।

अवैध मजारों पर कार्रवाई की सराहना

अपने संबोधन में हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा राज्य में चलाई जा रही ‘अतिक्रमण हटाओ मुहिम’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में सरकारी जमीनों और जंगलों से अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक विरासत को बचाने का एक बड़ा प्रयास बताया।

धामी सरकार के फैसलों पर जताया भरोसा

हेमंत द्विवेदी ने उत्तराखंड सरकार की अन्य उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में जनता का विश्वास सरकार पर लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं को मुख्य आधार बताया:

  • समान नागरिक संहिता (UCC): उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने UCC लागू कर समानता का संदेश दिया।
  • कठोर नकल विरोधी कानून: युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त कानून लाया गया।
  • अंकिता भंडारी मामला: पारदर्शिता के लिए सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश की गई।
  • जन-जन की सरकार: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसी योजनाओं से प्रशासन सीधे आम आदमी तक पहुँचा है।

देवभूमि की पवित्रता के लिए BKTC और सरकार का समन्वय

हेमंत द्विवेदी ने अंत में विश्वास जताया कि राज्य सरकार और BKTC के बीच बेहतर तालमेल से देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता और गौरव की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और वहां की मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मंदिर समिति आने वाले दिनों में सुरक्षा और निगरानी के तंत्र को भी और मजबूत करने जा रही है।

BKTC के इस फैसले ने पूरे राज्य में एक नई चर्चा छेड़ दी है। जहां श्रद्धालु इस फैसले को धर्म और आस्था की सुरक्षा मान रहे हैं, वहीं राजनीतिक हलकों में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। अब सबकी निगाहें मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक पर टिकी हैं।

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