Delhi pollution: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। एयर प्यूरीफायर को ‘चिकित्सा उपकरण’ घोषित करने और उस पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति आपातकाल जैसी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार है, लेकिन सरकार इस दिशा में कुछ ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि कम से कम अस्थायी तौर पर एयर प्यूरीफायर पर टैक्स में छूट दी जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
याचिकाकर्ता के वकील कपिल मदान ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की 2020 की अधिसूचना के अनुसार एयर प्यूरीफायर ‘मेडिकल डिवाइस’ के मानकों को पूरा करता है। इसके बावजूद इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जा रहा है, जो आम लोगों के लिए बोझ बन गया है।
कोर्ट ने कहा कि एयर प्यूरीफायर उपलब्ध कराना सरकार का न्यूनतम कर्तव्य है। चाहे यह छूट एक हफ्ते या एक महीने के लिए ही क्यों न हो, लेकिन मौजूदा हालात को आपात स्थिति मानकर फैसला लिया जाना चाहिए।
सरकार से नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जवाब देने के लिए 15 दिन क्यों चाहिए। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार आज दोपहर 2:30 बजे तक बताए कि वह इस मुद्दे पर क्या कदम उठाने जा रही है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक कब होगी और उसमें कौन-सा प्रस्ताव रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि लोग दिन में करीब 21 हजार बार सांस लेते हैं और अगर हर बार प्रदूषित हवा फेफड़ों में जा रही है तो इससे सेहत को कितना नुकसान हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
अंत में हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इतने गंभीर प्रदूषण के स्तर पर लोगों की सेहत को हल्के में नहीं लिया जा सकता और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
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