IIT Delhi’s AILA: सोचिए एक ऐसा AI सहायक जो बिना किसी इंसान की मदद के प्रयोगशाला में काम कर सके, उपकरणों को सही से चलाए और परिणामों का विश्लेषण भी करे। अब यह सिर्फ कल्पना नहीं है। IIT दिल्ली के वैज्ञानिकों ने ऐसा AI एजेंट बनाया है, जिसका नाम है AILA (Artificial Intelligence Laboratory Assistant)।
AILA एक लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी मशीन या उपकरण के साथ जुड़कर पूरी तरह स्वचालित तरीके से काम कर सकता है। यानी AILA प्रयोगशाला में इंसानों की तरह काम कर सकता है, मापदंड बदल सकता है, परिणाम देख सकता है और फीडबैक भी दे सकता है।
प्रो. एन.एम. अनूप कृष्णन, जोकि IIT दिल्ली के सिविल और पर्यावरण विभाग और यार्डी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, वो बताते हैं कि AILA का इस्तेमाल करने के लिए इंसान बस कंप्यूटर पर कमांड दे सकता है। इसके बाद यह वास्तविक प्रयोगशाला में खुद काम करेगा।

AILA को तैयार करने में लगभग एक साल का वक्त लगा। इस दौरान AILA ने कई बार गलतियां भी की, लेकिन इंसानों की तरह यह थकता नहीं है। चौबीसों घंटे लगातार काम करने की क्षमता के कारण यह लगातार सीखता और सुधार करता रहा।
वैज्ञानिकों ने AILA के परीक्षण के लिए सौ प्रयोगों का सेट तैयार किया था। इसके बाद उन्होंने इसकी ChatGPT, Google Gemini, LLaMA जैसे कई बड़े भाषा मॉडल्स के साथ तुलना की। प्रो. अनूप कृष्णन ने कहा कि जैसे इंसान प्रयोगों में गलती करता है, वैसे ही बड़े भाषा मॉडल भी गलती करते हैं। लेकिन AILA लगातार काम करता है और अपने अनुभव से सीखता रहता है।
AILA को बनाने में डेनमार्क और जर्मनी के वैज्ञानिकों का भी सहयोग रहा। यह शोध प्रसिद्ध जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुआ, जिसमें लेख का टाइटल था ‘Evaluating Large Language Model Agents for Automation of Atomic Force Microscopy’। इस शोध में दिखाया गया कि कैसे बड़े भाषा मॉडल वास्तविक प्रयोगशालाओं में काम कर सकते हैं और इंसानी मदद के बिना अहम प्रयोगों को पूरा किया जा सकता है।
AILA की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रयोगशाला में सावधानी से काम करता है। जैसे कि यह परमाणु बल माइक्रोस्कोप (Atomic Force Microscope) के मापदंड सेट करता है, डेटा एकत्र करता है और वैज्ञानिकों को रिपोर्ट भेजता है। इससे समय की बचत होती है और इंसानी त्रुटियों की संभावना भी कम हो जाती है। यानी भविष्य में AILA जैसी तकनीक पूरी तरह स्वचालित प्रयोगशालाओं के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
इससे वैज्ञानिक अपने शोध को तेज और सुरक्षित तरीके से कर पाएंगे। AILA न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुसंधान और प्रयोगों के लिए नए अवसर खोल सकता है। यह दिखाता है कि AI और मशीन लर्निंग अब केवल कंप्यूटर या डेटा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक प्रयोगशालाओं में भी इंसानों की मदद कर सकते हैं। अब AILA के जरिए विज्ञान की दुनिया में नए आयाम खुलने जा रहे हैं। जो ना सिर्फ शोध को तेज करेगा बल्कि भविष्य में नए अविष्कार और तकनीकी प्रगति के दरवाजे भी खोलेगा।
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