Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti : सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर जानिए कैसे उन्होंने देश को मजबूत बनाया

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti : आज 31 अक्टूबर को पूरा देश भारत के ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है। वे स्वतंत्र भारत को एकजुट करने वाले महान नेता थे। 1947 में आजादी के बाद जब देश टूटने की कगार पर था, पटेल ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से 565 रियासतों को भारत में मिलाया। गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने मजबूत प्रशासन की नींव रखी। उनकी वजह से आज भारत एक मजबूत राष्ट्र है। आइए आज उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर उनकी जिंदगी और योगदान के बारे में जानते हैं।

भारत को एकजुट करने का काम

आजादी के समय भारत का 40% हिस्सा 565 छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा था। इन राजाओं को नए भारत में शामिल करना बहुत मुश्किल था। सरदार पटेल ने मीठी बातों और जरूरत पड़ने पर सख्ती से काम लिया। ज्यादातर रियासतें अपनी मर्जी से जुड़ीं, लेकिन हैदराबाद के निजाम ने विरोध किया। पटेल ने ‘ऑपरेशन पोलो’ चलाकर निजाम को समझौता करने पर मजबूर किया। इससे कम से कम नुकसान हुआ और भारत एक रहा। यही वजह है कि उन्हें ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है। उनकी कूटनीति ने नवजात भारत को मजबूत बनाया।

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti

अखिल भारतीय सिविल सेवा की नींव

ब्रिटिश राज में सिविल सेवा को ‘स्टील फ्रेम’ कहा जाता था, जो अंग्रेजों के हित बचाती थी। आजादी के बाद कई लोग इसे खत्म करना चाहते थे, लेकिन पटेल ने इसे राष्ट्र की रीढ़ माना। 1946 में उन्होंने प्रांतीय नेताओं की बैठक बुलाई और नई सेवा बनाने का फैसला किया। उनकी कोशिश से आईसीएस की जगह आईएएस और आईपीएस बनी। पटेल ने युवा अफसरों से कहा, “लोगों की सेवा ईमानदारी और नम्रता से करो।” आज भी आईएएस-आईपीएस भारत का मजबूत प्रशासन चलाते हैं। पटेल जानते थे कि बिना अच्छे अफसरों के लोकतंत्र नहीं चल सकता।

पहली जनगणना की शुरुआत

पटेल जनगणना को सिर्फ लोगों की गिनती नहीं मानते थे। वे इसे समाज और अर्थव्यवस्था की सही जानकारी का जरिया समझते थे। 1950 में उन्होंने जनगणना अधिकारियों की बैठक की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ सिर गिनती नहीं, बल्कि लोगों की कमाई, नौकरी और जीवन की पूरी तस्वीर देगी।” 1951 में हुई पहली जनगणना पटेल की सोच पर बनी। इससे सरकार हर घर तक पहुंची और योजनाएं बनाने में मदद मिली। आज भी जनगणना नीति बनाने का आधार है।

‘सरदार’ उपाधि की कहानी

1928 में गुजरात के बारडोली में किसानों पर भारी टैक्स लगा था। पटेल ने शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया और किसानों को एकजुट किया। आंदोलन इतना अनुशासित था कि सरकार को टैक्स बढ़ोतरी रद्द करनी पड़ी। यहीं किसानों ने उन्हें ‘सरदार’ कहा, जो नाम जीवनभर चला। इससे पहले 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी की मदद करते हुए पटेल ने अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई। ये शुरुआती आंदोलन बाद में देशव्यापी हो गए।

मजबूत सेना की वकालत

15 जनवरी 1948 को मुंबई में एक लाख लोगों के सामने पटेल ने कहा, “राष्ट्र की सुरक्षा के लिए मजबूत सेना जरूरी है।” गांधीजी सैन्य शक्ति में विश्वास नहीं करते थे, लेकिन पटेल व्यावहारिक थे। उन्होंने कहा, “हमारी सेना इतनी ताकतवर हो कि कोई दुश्मन सोचे भी नहीं।” यह गांधीवादी विचार और राष्ट्रीय सुरक्षा का संतुलन था। पटेल की सोच आज भी भारतीय सेना की मजबूती का आधार है।

पटेल का अमर योगदान

सरदार पटेल ने भारत को भौगोलिक, प्रशासनिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया। उनकी दृढ़ता और दूरदर्शिता ने विविधता वाले देश को एक सूत्र में बांधा। 150वीं जयंती पर हम उन्हें याद करते हैं और सीखते हैं कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी हों, हिम्मत और समझदारी से पार की जा सकती हैं। सरदार पटेल का भारत आज भी उनकी नींव पर खड़ा है।

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