उत्तराखंड में कम बरस रहा मानसून, कमजोर पड़ने लगे हैं पश्चिमी विक्षोभ….प्रदेश में डगमगाई मानसून की तासीर

उत्तराखंड में कम बरस रहा मानसून

 

 

उत्तराखंड में यूं तो मानसून पूरी तरह से सक्रिय है और संपूर्ण प्रदेश में मानसून बादल घुमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, लेकिन मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष मानसून काफी कम बरस रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार चूंकि पश्चिमी विक्षोभ शीतकाल में सूखे की भेंट चढ़ गया था, लिहाजा पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ जाने से मानसून सत्र में भी बादल कम बरस रहे हैं। अगर बीते वर्ष से तुलना करी जाए तो इस वर्ष नैनीताल जैसे पर्वतीय जिले में भी मानसून काफी कम बरस रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष 25 जुलाई तक 955 मिमी वर्षा हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष मात्र 822 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। वहीं सिंचाई विभाग के झील नियंत्रण कक्ष के मुताबिक गत वर्ष की तुलना में अभी तक 132 मिमी पानी कम बरसा है, तो वहीं जनवरी माह में तो पानी की एक बूंद तक जमीन पर नहीं गिरी।

 

 

कमजोर पड़ने लगे हैं पश्चिमी विक्षोभ

 

 

मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार मानसून अब कमजोर पड़ने लगे हैं जिसका सीधा संबंध पश्चिमी विक्षोभ से है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अगर बीते 6 महीनों में हुई कुल वर्षा की बात करी जाए तो फरवरी माह में मात्र एक ही दिन में 50 मिमी वर्षा दर्ज करी गई, जबकि मार्च माह में तो केवल दो ही दिन 56 मिमी वर्षा हुई। वहीं अप्रैल माह में कुल पांच दिन 30 मिमी वर्षा दर्ज करी गई और मई के 14 दिन हुई वर्षा में 115 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। इसके अतिरिक्त जून माह में अधिकांश दिन हुई वर्षा 393 मिमी रिकार्ड की गई। जुलाई में अभी तक 178 मिमी वर्षा हुई है। जबकि बीते वर्ष 2024 से इसकी तुलना करी जाए तो जनवरी माह बिल्कुल सूखा ही रहा। वर्ष 2024 में फरवरी में 15 मिमी मार्च में 26 मिमी अप्रैल में दो मिमी, मई में 70 मिमी, जून में 214 मिमी और जुलाई में अभी तक 628 मिमी वर्षा हुई थी।

 

प्रदेश में डगमगाई मानसून की तासीर

 

 

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भी वर्षा का कम होना चिंता का बिंदु है। इसी क्रम में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ वायुमंडलीय विज्ञानी डा. नरेंद्र सिंह के अनुसार नैनीताल में वर्षा की मात्रा में कमी का मुख्य कारण जलवायु में बदलाव है। चूंकि जिस प्रकार कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड पहुंच रहे हैं उसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है, पर्वतीय राज्यों में भी कम वर्षा का होना चिंता का विषय तो है ही इसके अतिरिक्त शोध का भी विषय है। वहीं वरिष्ठ वायुमंडलीय विज्ञानी डा. नरेंद्र सिंह के अनुसार चूंकि प्रदेश के नैनीताल जिले में हर जगह कंक्रीट निर्माण अधिक होने से हरियाली न के बराबर ही बची है, लिहाजा इस कारण नैनीताल के क्षेत्रीय स्तर के मौसम में बदलाव आया है। उधर, शुक्रवार को मौसम दोपहर तक सुहावना बना रहा। इसके बाद बूंदाबांदी हुई। शाम को कोहरा छा गया।

 

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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