उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पर मानसून का खौफ, सीमा विवाद नहीं आपसी तालमेल बनेगा साथी…..सुरक्षा बलों का होगा साथ

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पर मानसून का खौफ

 

 

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सारी तैयारियां पूरी करी जा चुकी हैं, इसी क्रम में राज्य सरकार ने मानसून सत्र को मध्यनजर रखते हुए NDRF व SDRF की समेत सुरक्षा बलों को भी अलर्ट मोड पर रखा है। दरअसल, उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सुगमता से संपन्न कराने के लिए एक विशेष योजना को तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश के पर्वतीय व बार्डर इलाकों पर स्थित गांवों में पंचायत चुनाव के समय यदि कोई अप्रत्याशित घटना घटती है तो उसके लिए दूसरे जनपद के प्रशासन के साथ-साथ राहत बचाव दस्ते व सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। वहीं, तहसील स्तर पर चुनाव व आपदा से संबंधित मामलों की जानकारी को बकायदा अलग अलग कंट्रोल रुम भी स्थापित कर दिए गए हैं जबकि मुख्यालय स्तर पर स्थापित कंट्रोल रुम से लगातार फिडबैक लिया जा रहा है।

 

 

सीमा विवाद नहीं आपसी तालमेल बनेगा साथी

 

 

 

 

उत्तराखंड में यह पहली बार होगा जब मानसून सत्र में पंचायत चुनावों को संपन्न कारया जाएगा, लिहाजा इस बार इन पंचायत चुनावों ने चुनाव आयोग के विभागीय अधिकारियों का सुख चैन छिन लिया है। वहीं इस बार पंचायत चुनाव में भागीदारी कर रहे प्रत्याशियों के माथे पर भी लगातार बदल रहे मौसम के मिजाज से चिंता की लकीरें साफ नजर आती हैं। वहीं प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में सकुशल पंचायत चुनाव को संपन्न कराने पर आपातकालीन परिचालन केंद्र प्रभारी कमल मेहरा का कहना है कि अब सीमा विवाद आड़े नहीं आएगा बल्कि हम और भी बेहतर तालमेल से कार्य करेंगे। हालांकि, मौसम बिगड़ने पर विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों में मतदाता मतदान को कैसे पहुंचेंगे ये सोचकर प्रत्याशी चिंतित हैं पर चुनाव व आपदा से निपटने को तंत्र ने विशेष तैयारी कर ली है। चूंकि प्रदेश में पहले चरण के मतदान की तारिख नजदीक है लिहाजा आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट मोड पर आ गया है। किसी भी विपरीत परिस्थितियों से निपटने को अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर छड़ा व जिला मुख्यालय में तैनात एसडीआरएफ तथा भवाली में तैनात एनडीआरएफ ईकाई को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।

 

 

सुरक्षा बलों का होगा साथ

 

आपातकालीन परिचालन केंद्र प्रभारी कमल मेहरा का कहना है कि आवश्यक्ता पड़ने पर कुमाऊं रेजिमेंट के दो कॉलम व CRPF और SSB यूनिट की भी मदद ली जाएगी। चूंकि इस बार तहसील स्तर पर आपदा के साथ ही चुनाव कंट्रोल रुम भी स्थापित किया गया है लिहाजा जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रुम से तहसील स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रुम से रोजाना फिडबैक लिया जाएगा। इसमें रोचक बात यह है कि मौसम बिगड़ने पर सीमाओं पर स्थित गांवों में मतदान प्रभावित न हो इसके लिए आपसी समन्वय व तालमेल से दोनों जिलों के अधिकारी व कर्मचारी कार्य करेंगे। आपदा की स्थिति में भी मिलकल राहत व बचाव कार्य किया जाएगा। जरुरत पड़ने पर मतदाताओं को सुरक्षित मतदान केंद्र तक पहुंचाने व मतदान के बाद वापस गांव तक छोड़ने के लिए विशेष रुप चार्ट भी तैयार किया गया है। वैकल्पिक रुट भी तलाशा गया है।

 

 

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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