उत्तराखंड में बारिश से जनजीवन प्रभावित
उत्तराखंड में मानसून ने अपना कहर बरपाना शुरु कर दिया है, प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-वयस्त हो चुका है। इस समय उत्तराखंड के अधिकतर सीमांत जिलों ने अपना संपर्क सीमा क्षेत्रों से खो दिया है,चूंकि सीमांत जिलों में लगातार हो रही बारिश के कारण सड़के बह चुकी हैं और जो शेष भी हैं वे भी मलबा आने के कारण बाधित हैं। ताजा जानकारी के अनुसार उत्तराखंड का चीन सीमा क्षेत्र से संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है, तो वहीं विश्वप्रसिद्घ कैलाश मानसरोवर यात्रा आज चौथे दिन भी बंद है। चौथे दल के कैलास मानसरोवर यात्री आधार शिविर धारचूला में ठहरे हैं, क्योंकि टनकपुर-पिथौरागढ़-तवाघाट हाईवे घाट बैंड ओर धारचूला से आगे दोबाट में बंद है। जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ का मैदानी क्षेत्र सहित अन्य जनपदों से संपर्क काटा हुआ है। वहीं सीमांत क्षेत्र की तकरीबन 25 सड़कें इस समय पूरी तरह से बंद हैं। वहीं उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, ऋषिकेश व हरिद्वार में गंगा नदी अपने खतरे के निशान से भी उपर बह रही है, लिहाजा प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
सीमांत जिलों का टूटा आपसी संपर्क
उत्तराखंड के सीमांत जिलों में हो रही भारी बारिश ने शासन-प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, प्रदेश के सीमांत जिलों का संपर्क चीन सीमा क्षेत्र से पूरी तरह टूट चुका है। वहीं जिले के तीनों सीमा मार्ग तवाघाट-लिपुलेख, तवाघाट-सोबला-दारमा और ममुनस्यारी-मिलम मार्ग चौथे दिन भी बंद है, जबकि जिला सड़क थल-मुनस्यारी दो स्थानों पर बंद है। जौलजीबी-मुनस्यारी मार्ग भी छह घण्टे बाद छोटे वाहनों के लिए ही खुल सकी है। हालांकि, धारचूला क्षेत्र में वर्षा कम होने से हल्की राहत तो जरुर है, लेकिन क्षेत्र की 25 सड़के बंद पड़ी हैं, पहाड़ो से लगातार गिर रहे पत्थरों और मलबे को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने लोगों से आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। सभी पुलिस थानों, चौकियों, आईटीबीपी चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। लोगो से नदी, नालों की किनारे नही जाने की अपील की गई है।
उफान पर हैं नदियां
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते पर्वतीय जिलों में आपदा की स्थिति बन चुकी है, आपको बता दें कि मुनस्यारी विकास खण्ड के दाफा में पहाड़ दरकने से प्रभावित 15 परिवार गांव में ही अन्य मकानों में शरण लेकर रहना पड़ रहा है। वहीं थल मुनस्यारी मार्ग का पचास मीटर से अधिक हिस्सा बह गया है, जहां सड़कें थी वहां अब नाले बहने लगे हैं। मदकोट में मंदाकिनी नदी के कटाव से डाबरी गांव के आठ परिवार खतरे में आ गए हैं, वहीं स्थानियों द्वारा परिवारों को सुरक्षित स्थान पर रखने की मांग की गई है। उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है काली नदी 889.85 मीटर पर बह रही है जिसका खतरे का स्तर 890 मीटर है। गोरी नदी 605.40 मीटर पर है, जबकि इसका चेतावनी स्तर 606.80 मीटर है। सरयू नदी घाटी में 451 मीटर पर पहुच चुकी है। चेतावनी लेवल 452 मीटर है। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त सरयू नदी घाटी में 451 मीटर पर पहुंच चुकी है, जबकि इसका चेतावनी स्तर 452 मीटर है। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

