उत्तराखंड में मदरसा पर नैनीताल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
उत्तराखंड स्थित नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में संचालित मदरसों पर एक बड़ा फैसला देते हुए अगली सुनवाई 11 जून को तय कर दी है। दरअसल, नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून के विकास नगर स्थित इनामुल उलूम सोसायटी के अध्यक्ष याचिकाकर्ता जुबेर अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार को सोसायटी संचालित भवन की सील खोलने का निर्देश दिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सोसायटी को यह अंतरिम राहत सिर्फ इस शर्त पर दी है कि याचिकाकर्ता को यह वचन देना होगा कि वह राज्य सरकार की अपेक्षित मान्यता के बिना कोई भी मदरसा संचालित नहीं करेंगे। वहीं नैनीताल हाईकोर्ट के इस निर्णय को दूरगामी और उत्तराखंड सरकार का पक्षधर बताया जा रहा है।
बिना सुनवाई का मौका दिए संपत्ति सील करना उचित नहीं
उत्तराखंड स्थित नैनीताल हाईकोर्ट में बीते बुधवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ द्वारा इनामुल उलूम सोसायटी के अध्यक्ष याचिकाकर्ता जुबेर अहमद की याचिका पर सुनवाई करी गई, याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में कहा कि सोसायटी एक मदरसा चलाती है, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने सोसायटी के परिसर को गैर कानूनी तरीके से सील कर दिया। याचिकाकर्ता ने नैनीताल हाईकोर्ट से मांग करी की उत्तराखंड सरकार को सोसायटी के परिसर की सील हमेशा के लिए खोलने के लिए निर्देश दिए जाएं। इसी क्रम में सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सरकार द्वारा तय नियमों का उल्लंघन करते हुए मदरसा चला रहा है। उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत किसी भी रुप से राहत का हकदार नहीं है, इस पर याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में कहा कि यदि सोसायटी अपने उद्देश्यों से परे भी काम कर रही है तो भी ऐसी स्थिति में उसे सुनवाई का मौका दिए बिना उत्तराखंड सरकार सोसायटी की संपत्ति को सील नहीं कर सकती है।
संचालन के लिए उत्तराखंड सरकार की मान्यता आवश्यक
नैनीताल हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सरकार के पक्षधर महाधिवक्ता ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता की संपत्ति को सील नहीं किया जाता है तो संभव है कि याचिकाकर्ता दोबारा पूर्व की गतिविधियों को दोहराने का कार्य करे। जबकि इस दलील पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वह वचन देते हैं कि वे कोई भी मदरसा संचालित नहीं करेंगे। इसके बाद जब नैनीताल हाईकोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा याचिकाकर्ता की संपत्ति को बिना किसी कारण बताओ नोटिस और बिना किसी सुनवाई का मौका दिए ही सील कर दिया गया है तो नैनीताल हाईकोर्ट ने संपूर्ण मामले को सुनने के बाद भवन को खोलने की अनुमति मात्र इस शर्त पर दी है कि याचिकाकर्ता को यह वचन देना होगा कि वह राज्य सरकार की अपेक्षित मान्यता के बिना कोई भी मदरसा संचालित नहीं करेंगे। वहीं उक्त मामले की अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 11 जून की तिथि तय की है, इसके अतिरिक्त नैनीताल हाईकोर्ट के इस निर्णय को दूरगामी और उत्तराखंड सरकार का पक्षधर बताया जा रहा है।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

