क्या विदेश मंत्री एस जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा से सुधर पाएंगे दोनों देशों के रिश्ते?

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी बात की पुष्टि करते हुए कहा कि विदेश मंत्री 15 और 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में होने वाली SCO की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

एस जयशंकर
एस जयशंकर

2 दिग्गजो के बाद अब एस जयशंकर का पाकिस्तान दौरा

 

एस जयशंकर पहले दिसंबर 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ”हर्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस” में हिस्सा लेने इस्लामाबाद पहुंची थीं । इसके ठीक कुछ ही दिन बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ”सरप्राइज़ विज़िट” पर लाहौर गए थे।

क्या रिश्तों में सुधार लाने के तौर पर देखा जाएगा जयशंकर का पाकिस्तान दौरा ?

 

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,”यह दौरा एससीओ मीटिंग के लिए है,आप लोग इससे ज़्यादा इसके बारे में न सोचें.”
साथ ही विदेश नीति विभाग के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष वी पंत का मानना है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए यह दौरा ज़्यादा अहम नहीं है, लेकिन एससीओ के लिहाज़ से ये महत्वपूर्ण है।

भारत-पाकिस्तान
प्रतिकात्मक तस्वीर

पाकिस्तान में कैसे पेश आएंगे एस जयशंकर ?

 

प्रोफ़ेसर पंत ने कहा कि, “एस जयशंकर पाकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन के मुद्दे को लेकर जा रहे हैं, न कि भारत-पाकिस्तान संबंधों पर बातचीत के लिए। जयशंकर वहां भारत की कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाने पर ज़ोर देंगे ,इसलिए, मुझे नहीं लगता कि वह पाकिस्तान के साथ कोई द्विपक्षीय मतभेदों को उजागर करेंगे.”

उन्होने आगे कहा, ”एस जयशंकर का आक्रामक रुख़ अक्सर तब दिखता है जब पश्चिमी देशों के साथ मुद्दों पर बातचीत होती है ,लेकिन अगर आप पड़ोसी देशों (PAK को छोड़कर) की बात करें ,तो उनकी कूटनीति अधिक सूक्ष्म रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मालदीव है, जिस समय मालदीव में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना हो रही थी और काफी उथल-पुथल चल रही थी, तब भी भारत के विदेश मंत्रालय या किसी भी नेता ने कोई टिप्पणी नहीं की । नतीजतन ,कुछ महीनों बाद भारत-मालदीव के संबंध सामान्य हो गए.”।

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