नैनीताल हाई कोर्ट ने एलयूसीसी चिटफंड 800 करोड़ घोटाले की जांच के लिए CBI जांच याचिका जनहित याचिका से जोड़ी

नैनीताल हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन

 

नैनीताल उच्च न्यायालय ने एलयूसीसी चिटफंड कंपनी के 800 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए दायर सीबीआई जांच याचिका को पहले से चल रही जनहित याचिका के साथ जोड़ दिया है। इस घोटाले में कंपनी पर बिना पंजीकरण के कार्यालय खोलकर निवेशकों को धोखा देने का आरोप है, जिससे देहरादून, ऋषिकेश सहित अन्य स्थानों के कई निवेशक प्रभावित हुए हैं। मुख्य आरोपी के दुबई भागने के बाद पीड़ित अपनी डूबी हुई रकम की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। न्यायालय ने सीबीआई से जांच में अपनी राय मांगी थी, जिसके बाद सीबीआई के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जांच के निर्देश आ चुके हैं। इस पर कोर्ट ने इस याचिका को भी जनहित याचिका के साथ सुनवाई के लिए खंडपीठ में भेज दिया है। यह कदम भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत है, जिससे प्रदेश के नागरिकों के हितों की रक्षा होगी।

 

एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में निवेशक परेशान, मुख्य आरोपी दुबई फरार

 

 

 

ऋषिकेश निवासी आशुतोष की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि एलयूसीसी चिटफंड कंपनी ने 2021 में प्रदेश के कई जिलों में अपने कार्यालय खोलकर स्थानीय लोगों को एजेंट बनाकर निवेश के फरेब किए। कंपनी ने सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं कराया और 2023-24 में अचानक कार्यालय बंद कर फरार हो गई। निवेशकों की शिकायत पर प्रदेश और अन्य राज्यों में 56 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन मुख्य आरोपी दुबई भाग चुका है। पीड़ित निवेशक अपनी डूबी रकम वापस पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और पुलिस से भी मदद नहीं मिल रही है। इस बीच यह सवाल उठता है कि क्या सीबीआई इस मामले की जांच कर सकती है, ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके और चिटफंड घोटाले पर प्रभावी कार्रवाई हो।

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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