Delhi Assembly Winter Session 5 जनवरी से होने जा रहा है शुरू, CAG रिपोर्ट्स पर हंगामे के आसार

Delhi Assembly Winter Session : नई दिल्ली 1 जनवरी 2026, नए साल के साथ दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा। यह चार दिवसीय सत्र होगा, जिसमें उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना पहले दिन सदन को संबोधित करेंगे। सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन सबसे ज्यादा हंगामा CAG रिपोर्ट्स को लेकर होने की उम्मीद है।

सत्र की शुरुआत और मुख्य एजेंडा

सत्र की शुरुआत 5 जनवरी को सुबह 11 बजे उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण से होगी। इसके बाद सदन की नियमित कार्यवाही शुरू होगी। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सत्र में विधायी कार्यों के साथ-साथ जनता से जुड़े मुद्दों पर फोकस रहेगा। तीन दिनों तक क्वेश्चन आवर होगा, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन जैसे विभागों से सवाल पूछे जाएंगे।

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CAG रिपोर्ट्स बनेगी हंगामे की वजह

सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा CAG की रिपोर्ट्स रहेंगी। सरकार पूर्व AAP सरकार के कार्यकाल से जुड़ी 3 से 5 CAG रिपोर्ट्स सदन में पेश करेगी। इनमें शामिल हैं:
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक बंगले के जीर्णोद्धार (जिसे BJP ‘शीश महल’ कहती है) पर रिपोर्ट।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) में कथित अनियमितताओं पर रिपोर्ट।

राज्य संचालित विश्वविद्यालयों और मोहल्ला क्लिनिक से जुड़ी रिपोर्ट्स।

BJP इन रिपोर्ट्स के आधार पर पूर्व AAP सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर हमलावर होगी। वहीं, AAP इन रिपोर्ट्स को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताकर पलटवार करेगी।

प्रदूषण पर भी होगी जोरदार बहस

दिल्ली में जारी प्रदूषण संकट को देखते हुए सरकार इस मुद्दे पर विशेष प्रस्ताव लाएगी। मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पिछले 20 सालों के वैज्ञानिक रिपोर्ट्स पेश किए जाएंगे और पूर्व सरकारों की कमियों पर चर्चा होगी। BJP सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपना ब्लूप्रिंट भी सदन में रखेगी। AAP इसे केंद्र सरकार की नाकामी बताकर जवाब देगी।

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विपक्ष और सत्ता पक्ष की रणनीति

विपक्ष (AAP) प्रदूषण, जल संकट, विकास कार्यों में रुकावट और केंद्र-LG के हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। वहीं, सत्ता पक्ष (BJP) पूर्व सरकार की खामियां उजागर कर जवाब देगा। सदन में आरोप-प्रत्यारोप की वजह से जनहित के मुद्दों पर ठोस चर्चा कम होने की आशंका है।


यह सत्र दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा होगा। उम्मीद है कि हंगामा तो होगा, लेकिन कुछ सकारात्मक फैसले भी निकलेंगे। सदन की कार्यवाही पर पूरे देश की नजर रहेगी!

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