NCERT Textbook Panel: नई दिल्ली में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा 11 और 12 के लिए राजनीति विज्ञान की पुस्तकों को तैयार करने वाली टीम में बदलाव किया है। नई टीम में विश्वविद्यालयों के शिक्षक, स्कूल के अध्यापक, और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के अधिकारी शामिल हैं।
हाल की खबरों के अनुसार, इस टीम में कम से कम चार लोग हैं जिनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या इससे जुड़े संगठनों से संबंध रहा है। इसकी वजह से नई पुस्तकों की संभावित दिशा और सामग्री को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक जगत में चर्चा शुरू हो गई है।
संदीप शास्त्री करेंगे टीम का नेतृत्व
नई पाठ्यपुस्तक विकास टीम की अध्यक्षता राजनीतिक विश्लेषक और शिक्षाविद् संदीप शास्त्री कर रहे हैं, जो निट्टे डीम्ड यूनिवर्सिटी के उपाध्यक्ष हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के अनुसार, टीम का मुख्य उद्देश्य कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को और भी मजबूत तथा व्यवस्थित बनाना है। नई पाठ्यपुस्तकों को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे के अनुसार तैयार किया जाएगा, जो विद्यालयी शिक्षा के लिए वर्ष 2023 में निर्धारित किया गया है।
पैनल में कौन-कौन शामिल हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, इस टीम में कुल 20 सदस्य हैं जो विभिन्न प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, पोंडिचेरी विश्वविद्यालय और उत्कल विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इसके अलावा, स्कूल के शिक्षकों और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के अकादमिक सदस्यों को भी इस टीम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
RSS से जुड़े बताए जा रहे चार नाम
चर्चा उन चार सदस्यों के बारे में है जिनके किसी रिपोर्ट के अनुसार RSS या उसके संगठनों से संबंध हैं।
इनमें JNU की एक प्रोफेसर और पूर्व ABVP राष्ट्रीय सचिव वंदना मिश्रा, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े यदुनाथ देशपांडे, पुणे में ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़े प्रशांत दिवेकर और JNU के एक अकादमिक रवि रामचंद्र शुक्ला शामिल हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के किसी संगठन से जुड़ा होना यह नहीं बताता कि उसकी किताब की सामग्री किसी विशेष राजनीतिक दृष्टिकोण के अनुरूप होगी। अंतिम किताबों की सामग्री और NCERT की आधिकारिक स्वीकृति इस मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।
नई किताबों में क्या बदलेगा?
एनसीईआरटी की नई टीम को पाठ्यपुस्तकों में सांस्कृतिक जड़ें, समावेश, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शैक्षिक प्रौद्योगिकी और मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है।
इसका अर्थ यह हो सकता है कि नई राजनीति विज्ञान की पुस्तकों में भारतीय संदर्भ और भारतीय ज्ञान परंपरा को अधिक महत्व दिया जाएगा।
हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि किसी विशिष्ट अध्याय, राजनीतिक व्यक्तित्व या ऐतिहासिक घटना को नई पुस्तकों में कैसे प्रस्तुत किया जाएगा।
कक्षा 11 की किताब नवंबर तक तैयार करने का लक्ष्य
एक नई समय सीमा के अनुसार, कक्षा 11 के राजनीति विज्ञान के पाठ्यपुस्तक को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद, कक्षा 12 के राजनीति विज्ञान के पाठ्यपुस्तक को 30 जुलाई 2027 तक पूरा करने की योजना है। जब पाठ्यपुस्तक तैयार हो जाएगी, तो उनकी समीक्षा की जाएगी और फिर अनुमोदन के बाद NCERT उन्हें प्रकाशित कर देगा।
भारतीय ज्ञान प्रणाली पर जोर
नई पाठ्यपुस्तकों के निर्माण में भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी मार्गदर्शक नीति का हिस्सा बनाया गया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की व्यापक शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा भी भारतीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री के अनुवाद पर काम किया जा रहा है, जिससे पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संदर्भ और स्थानीय भाषा को समझने में मदद मिलेगी।
इस प्रयास से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पाठ्यपुस्तकों में भारतीय परिप्रेक्ष्य और स्थानीय भाषाई पहुंच को लेकर व्यापक स्तर पर परिवर्तन किए जा रहे हैं।
राजनीतिक विज्ञान की किताबों को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है बदलाव?
राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें छात्रों को संविधान, लोकतंत्र, राजनीतिक संस्थाओं, अधिकारों, चुनाव, शासन और नागरिकता जैसे विषयों के बारे में मूल बातें सिखाती हैं।
इन पुस्तकों में होने वाले बदलाव का प्रभाव केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं रहता। पाठ्यक्रम में शामिल किए गए विषय और उन्हें प्रस्तुत करने के तरीके छात्रों की राजनीतिक और संवैधानिक समझ पर गहरा और लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव डाल सकते हैं।
इसीलिए, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव अक्सर शिक्षा विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों और समाज के नागरिकों के बीच चर्चा और बहस का मुद्दा बन जाते हैं।
पहले भी विवादों में रही हैं NCERT की किताबें

एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के सामग्री को लेकर पहले भी कई विवाद हुए हैं। इतिहास और सामाजिक विज्ञान की किताबों में विषयों के चयन, पाठों में बदलाव और कुछ सामग्री हटाने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और अकादमिक समूहों ने सवाल उठाए हैं।
२०२३ में पाठ्यक्रम के युक्तिकरण से जुड़े विशेषज्ञों में जेएनयू के प्रोफेसर उमेश अशोक कदम का नाम भी सामने आया था। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, वह आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सदस्य सचिव भी थे।
वहीं, एनसीईआरटी की वर्तमान पाठ्यपुस्तक व्यवस्था में विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, शिक्षकों और एनसीईआरटी अधिकारियों की भागीदारी लंबे समय से रही है। एनसीईआरटी की मौजूदा सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में भी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और स्कूल शिक्षकों वाली पाठ्यपुस्तक विकास समिति का उल्लेख मिलता है।
आलोचना और समर्थन दोनों की संभावना
नई NCERT textbook panel में RSS से जुड़े बताए जा रहे सदस्यों की मौजूदगी पर आलोचना की संभावना है। विपक्षी दल और कुछ शिक्षाविद् इसे पाठ्यपुस्तकों में वैचारिक प्रभाव के सवाल से जोड़ सकते हैं।
दूसरी ओर, समर्थक यह तर्क दे सकते हैं कि पाठ्यपुस्तक निर्माण में विभिन्न विचारों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करना पाठ्यक्रम को अधिक भारतीय और संदर्भ-आधारित बना सकता है।
अंततः इस बहस का सबसे महत्वपूर्ण आधार नई किताबों की वास्तविक सामग्री, तथ्यात्मकता, अकादमिक गुणवत्ता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप प्रस्तुति होगी।
आगे क्या होगा?
NCERT के सामने अब दो प्रमुख समयसीमाएं हैं। पहले कक्षा 11 की Political Science textbook को अंतिम रूप दिया जाएगा और उसके बाद कक्षा 12 की किताब तैयार की जाएगी।
नई किताबों के प्रकाशित होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि टीम ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, सांस्कृतिक संदर्भ, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक विचारों को किस तरह प्रस्तुत किया है।
निष्कर्ष
NCERT textbook panel का पुनर्गठन ऐसे समय हुआ है जब भारत में स्कूली पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों को लेकर वैचारिक तथा अकादमिक बहस लगातार जारी है। 20 सदस्यीय नई टीम में चार सदस्यों के RSS से जुड़े होने की रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि नई कक्षा 11 और 12 की Political Science किताबों में भारतीय ज्ञान प्रणाली, सांस्कृतिक जड़ों, संविधान, लोकतंत्र और समकालीन राजनीति को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है।
नई किताबों की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद ही यह आकलन संभव होगा कि NCERT का यह बदलाव भारतीय शिक्षा व्यवस्था में कितना बड़ा और किस दिशा में प्रभाव डालता है।
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