Uttarakhand Operation Hotspot – उत्तराखंड STF ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए गए “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” में बड़ी कार्रवाई की है। 7 दिन के इस अभियान में 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन कर 159 FIR दर्ज की गईं, जबकि 1,236 ATM Withdrawal Locations की जांच में 32 FIR हुईं। पुलिस ने 644 संदिग्ध SIM और 630 IMEI ब्लॉक किए हैं और 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। हरिद्वार में “नवादा ग्रुप” का खुलासा करते हुए 5 आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनसे 200 से ज्यादा Mule Accounts की कड़ियां सामने आई हैं। STF के मुताबिक, 2026 में अब तक 1930/NCRP के जरिए करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम Hold/Save कराई जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध की पूरी चेन पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
Online trading में मोटे profit का लालच, आसान loan का offer, fake customer-care call या “digital arrest” का डर—साइबर ठगी का चेहरा अलग हो सकता है, लेकिन पैसे को victim के account से निकालकर अपराधियों तक पहुंचाने वाली chain अक्सर कई स्तरों में काम करती है। इसी chain को तोड़ने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेशव्यापी सात दिवसीय “Operation Hotspot” चलाया। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 24 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चले अभियान में STF, Cyber Crime Units, District Cyber Cells और जनपद पुलिस ने bank accounts, ATM तथा cheque withdrawal locations, संदिग्ध SIM-POS, mobile numbers और IMEI जैसे digital-financial indicators को एक साथ जांच के दायरे में लिया। कार्रवाई का पैमाना बड़ा रहा। पुलिस के अनुसार 820 संदिग्ध बैंक खातों का verification किया गया, जिनके आधार पर 159 FIR दर्ज हुईं। 1,236 ATM withdrawal locations की जांच में 32 FIR और 84 cheque withdrawal locations के verification में 37 FIR दर्ज की गईं। साइबर अपराध में इस्तेमाल पाए गए 644 संदिग्ध SIM तथा 630 IMEI block कराए गए, जबकि 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी गई है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस केवल victim को फोन या message भेजने वाले ठग तक सीमित नहीं रही। जांच उन Money Mule Accounts, cash withdrawal handlers और facilitators तक बढ़ाई गई, जो रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसकी trail कमजोर करने में मदद करते हैं।
हरिद्वार में “नवादा ग्रुप” नाम से सामने आए कथित network के पांच आरोपियों की गिरफ्तारी इसी approach का उदाहरण है। पुलिस का कहना है कि इस group से 200 से अधिक mule accounts की कड़ियां मिली हैं। दूसरी तरफ, prevention की तस्वीर भी अहम है। वर्ष 2026 में 1930 और National Cyber Crime Reporting Portal पर मिली 18,749 शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए करीब ₹23.44 करोड़ की रकम Hold/Save कराई गई है। यह आंकड़ा बताता है कि fraud के बाद तुरंत complaint करना कितना जरूरी है। हालांकि hold हुई रकम को automatic refund नहीं समझना चाहिए; उसकी वापसी संबंधित जांच, banking और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है। Operation Hotspot का असली असर तभी टिकाऊ होगा, जब गिरफ्तारी के साथ banking misuse, fake SIM supply और cash-out network पर लगातार कार्रवाई जारी रहे।
Operation Hotspot में क्या बड़ी कार्रवाई हुई?
अभियान से पहले जुलाई 2026 में digital, telecom और financial data का technical analysis किया गया। I4C, DoT, RBI और दूसरी संबंधित संस्थाओं से मिले inputs को जोड़कर actionable intelligence तैयार हुई। इसके बाद पुलिस टीमों ने चिन्हित hotspots पर ground verification, पूछताछ, दबिश, FIR और गिरफ्तारी की कार्रवाई की। HNN की शुरुआती Operation Hotspot report में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में targeted action की जानकारी दी गई थी।
- 820 संदिग्ध bank accounts का verification हुआ।
- कुल 159 FIR bank-account inputs पर दर्ज हुईं।
- 644 SIM और 630 IMEI block कराए गए।
- 10 cyber criminals को गिरफ्तार किया गया।
- 442 संदिग्ध complaints/cases verify किए गए।
Money Mule Chain को Target करना Why जरूरी है?
Cyber fraud में Money Mule वह व्यक्ति या account होता है, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम receive, transfer या cash में withdraw करने के लिए किया जाता है। कई बार account holder commission के लालच में अपना bank account, ATM card, cheque book, SIM या UPI access किसी दूसरे को दे देता है। रकम victim से mule account में पहुंचने के बाद कई accounts में बांटी, ATM से निकाली या CDM के जरिए दूसरे account में जमा की जा सकती है। इससे money trail जटिल हो जाती है। Operation Hotspot में bank accounts के साथ ATM, cheque, SIM-POS और IMEI data पर एक साथ कार्रवाई इसी वजह से हुई। पुलिस ने 22 suspect SIM-POS verify कर 10 FIR दर्ज करने की जानकारी भी दी है। Chain के हर facilitator तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि केवल calling agent की गिरफ्तारी से पूरा fraud infrastructure बंद नहीं होता। वही accounts, SIM या devices दोबारा scam में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
- Account किराए पर देना अपराध में फंसा सकता है।
- ATM, cheque book और UPI PIN कभी share न करें।
- Unknown credit को तुरंत bank को report करें।
- Commission के बदले cash withdrawal से बचें।
Bank Account से IMEI तक: Action Comparison
अभियान का data दिखाता है कि जांच केवल संदिग्ध bank accounts तक सीमित नहीं थी। Police teams ने cash withdrawal points, cheque transactions, SIM sellers और mobile devices से जुड़े indicators भी verify किए। इससे financial trail और digital identity को एक साथ जोड़कर देखने की कोशिश सामने आती है।
| जांच का Target | Verification/जांच | दर्ज FIR या कार्रवाई |
|---|---|---|
| Suspect Bank Accounts | 820 | 159 FIR |
| ATM Withdrawal Locations | 1,236 | 32 FIR |
| Cheque Withdrawal Locations | 84 | 37 FIR |
| Suspect SIM-POS | 22 | 10 FIR |
| संदिग्ध Complaints/Cases | 442 | Verification पूरा |
| Suspect SIM | 644 | Block कराए गए |
| संदिग्ध IMEI | 630 | Block कराए गए |
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FAQs:Uttarakhand Operation Hotspot
1. उत्तराखंड में Operation Hotspot कितने दिन चला?
प्रदेशव्यापी अभियान 24 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक सात दिन चलाया गया।
2. Operation Hotspot में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
पुलिस के अनुसार अभियान में कुल 10 cyber criminals को गिरफ्तार किया गया।
3. Money Mule Account क्या होता है?
ऐसा account जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम receive, transfer या withdraw करने में किया जाता है, Money Mule Account कहलाता है।
4. Online financial fraud होने पर सबसे पहले क्या करें?
तुरंत अपने bank को सूचना दें, 1930 पर call करें और cybercrime.gov.in पर complaint दर्ज करें।
5. Hold/Save की गई रकम क्या तुरंत वापस मिल जाती है?
जरूरी नहीं। इसका अर्थ रकम का flow रोकना या freeze करना है; final refund संबंधित banking, investigation और legal process पर निर्भर करता है।

