बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में VIP प्राथमिक दर्शन शुल्क व्यवस्था को लेकर बीकेटीसी का फैसला

चारधाम यात्रा: बदरी-केदार में VIP अतिथियों के प्राथमिक दर्शन का ₹1100 शुल्क फिलहाल स्थगित, अगले साल बनेगी नई गाइडलाइन

देहरादून: चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में प्रोटोकॉल के तहत आने वाले VIP अतिथियों के प्राथमिक दर्शन के लिए लागू की गई ₹1100 प्रति व्यक्ति शुल्क व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) अब इस व्यवस्था के लिए विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने की तैयारी में है। नई व्यवस्था को अगले यात्रा वर्ष से लागू किए जाने की योजना है।

बीकेटीसी की ओर से यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब चारधाम यात्रा के दूसरे चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। 12 सितंबर को ऋषिकेश स्थित बीकेटीसी के ट्रांजिट कैंप में हुई बोर्ड बैठक में दूसरे चरण की यात्रा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई।

VIP दर्शन के लिए क्यों शुरू किया गया था ₹1100 शुल्क?

यात्रा के शुरुआती चरण में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में प्रोटोकॉल के तहत आने वाले VIP और अतिविशिष्ट अतिथियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। इन यात्रियों के लिए मंदिर में प्राथमिक दर्शन की व्यवस्था की जाती है।

इस व्यवस्था के कारण सामान्य श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन पर असर पड़ने की स्थिति को देखते हुए बीकेटीसी ने प्रोटोकॉल के तहत आने वाले अतिथियों के लिए ₹1100 प्रति यात्री शुल्क निर्धारित किया था।

इसका उद्देश्य VIP दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ-साथ सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन को प्राथमिकता देना था। मई 2026 में लागू की गई व्यवस्था में प्रोटोकॉल अतिथियों से शुल्क लेने और उनकी प्राथमिक दर्शन व्यवस्था को नियंत्रित करने की बात सामने आई थी।

दूसरे चरण में शुल्क व्यवस्था रहेगी स्थगित

अब चारधाम यात्रा के दूसरे चरण के दौरान इस ₹1100 शुल्क व्यवस्था को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है।

बीकेटीसी का फोकस अब ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें VIP या प्रोटोकॉल अतिथियों के दर्शन के लिए स्पष्ट नियम हों और सामान्य श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था भी प्रभावित न हो।

मंदिर समिति की ओर से अगले वर्ष के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी। इसमें प्रोटोकॉल अतिथियों की पहचान, प्राथमिक दर्शन की प्रक्रिया, शुल्क और व्यवस्था की पारदर्शिता जैसे पहलुओं को शामिल किए जाने की तैयारी है।

सामान्य श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन पर जोर

बीकेटीसी की प्राथमिकता सामान्य श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित दर्शन उपलब्ध कराना है। चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था सबसे अहम विषयों में शामिल रहती है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हाल में दूसरे चरण की यात्रा को लेकर कहा था कि धामों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने पर प्राथमिकता दी जा रही है।

इसी दिशा में दूसरे चरण की यात्रा से पहले मंदिर परिसर और व्यवस्थाओं को लेकर कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।

बदरीनाथ-केदारनाथ में VIP दर्शन से हुई लाखों की आय

पहले चरण में VIP अतिथियों के प्राथमिक दर्शन के लिए लागू शुल्क व्यवस्था से बीकेटीसी को आय भी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बदरीनाथ धाम में ₹1,63,11,900 और केदारनाथ धाम में ₹67,37,500 की आय इस व्यवस्था से प्राप्त हुई।

दोनों धामों को मिलाकर यह राशि ₹2,30,49,400 होती है।

हालांकि, इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं था। इसके पीछे प्राथमिक उद्देश्य प्रोटोकॉल अतिथियों की दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित करना और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की प्रक्रिया को सुगम बनाए रखना बताया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने भी किया सामान्य श्रद्धालुओं के साथ दर्शन

चारधाम यात्रा के दौरान VIP और सामान्य श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था को लेकर बहस के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का केदारनाथ धाम में सामान्य श्रद्धालुओं की तरह मुख्य द्वार से दर्शन करना भी चर्चा में रहा।

मुख्यमंत्री कपाट खुलने के अवसर पर केदारनाथ पहुंचे थे और उन्होंने सामान्य श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग से दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की व्यवस्था को करीब से देखा।

बीकेटीसी की ओर से लगातार यह बात कही जाती रही है कि मंदिरों में आने वाले सामान्य श्रद्धालुओं को बेहतर और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

अगले साल लागू होगी नई व्यवस्था

बीकेटीसी अब मौजूदा अनुभव के आधार पर VIP और प्रोटोकॉल दर्शन की नई व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसके लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन तैयार की जाएगी, ताकि अगले यात्रा वर्ष में व्यवस्था पहले से निर्धारित नियमों के अनुसार लागू की जा सके। इससे VIP दर्शन को लेकर किसी तरह की असमंजस की स्थिति को कम करने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मंदिर समिति की ओर से अगले साल लागू होने वाली व्यवस्था में किन श्रेणियों के लोगों को प्रोटोकॉल सुविधा मिलेगी, शुल्क कितना होगा और प्राथमिक दर्शन की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी गाइडलाइन तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

दूसरे चरण की यात्रा के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करने पर जोर

बीकेटीसी की 12 सितंबर की बोर्ड बैठक में दूसरे चरण की चारधाम यात्रा को लेकर कई व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। बैठक में धामों और अधीनस्थ मंदिरों में CCTV व्यवस्था को मजबूत करने तथा चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे मुद्दों पर भी निर्णय लिए गए।

दूसरे चरण में मानसून के बाद यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही फिर बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में मंदिर समिति की ओर से दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है।

एक नजर में

  • मुद्दा: VIP/प्रोटोकॉल अतिथियों के प्राथमिक दर्शन का शुल्क
  • शुल्क: ₹1100 प्रति व्यक्ति
  • धाम: बदरीनाथ और केदारनाथ
  • वर्तमान स्थिति: दूसरे चरण की यात्रा में शुल्क व्यवस्था स्थगित
  • आगे की योजना: नई गाइडलाइन तैयार होगी
  • लागू होने की तैयारी: अगले यात्रा वर्ष से
  • मुख्य उद्देश्य: सामान्य श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और पारदर्शी व्यवस्था
  • पहले चरण की आय: बदरीनाथ ₹1,63,11,900 और केदारनाथ ₹67,37,500

श्रद्धालुओं के लिए इसका क्या मतलब?

फिलहाल सामान्य श्रद्धालुओं के लिए बदरीनाथ और केदारनाथ में नियमित दर्शन व्यवस्था जारी है। ₹1100 वाली व्यवस्था प्रोटोकॉल के तहत आने वाले VIP अतिथियों की प्राथमिक दर्शन व्यवस्था से संबंधित थी, इसे सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुल्क नहीं समझना चाहिए।

बीकेटीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा 2026 से जुड़ी जानकारी और ऑनलाइन पूजा सेवाएं उपलब्ध हैं। श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले आधिकारिक पोर्टल पर ताजा निर्देश जरूर देख लेने चाहिए।

चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में अब बीकेटीसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रहेगी कि VIP और प्रोटोकॉल अतिथियों की व्यवस्था के साथ सामान्य श्रद्धालुओं के दर्शन में किसी तरह की परेशानी न हो। अगले वर्ष के लिए तैयार होने वाली नई गाइडलाइन इस व्यवस्था को कितना स्पष्ट और पारदर्शी बनाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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