Supreme Court's major ruling: Indefinite occupation of protest sites deemed improper; know the full story.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, धरना स्थलों पर अनिश्चितकालीन कब्जे को बताया गलत; केंद्र से मांगा जवाब ,जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर दिल्ली पुलिस की सख्ती को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी समूह विरोध प्रदर्शन के लिए किसी जगह पर अनिश्चित काल तक कब्जा करके नहीं बैठ सकता। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस जेवी मोहना की पीठ ने ‘किराना कमिटी दिल्ली’ की एक याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें त्योहारों के मौसम के दौरान विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान विरोध करने के अधिकार, पुलिस की कथित ज्यादतियों, सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदियों और प्रदर्शनों का व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर तीखी बहस हुई।

सुनवाई के दौरान, अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों पर विचार किया। व्यापारियों के संगठनों ने त्योहारों के मौसम में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की, और कहा कि इससे उनके कारोबार को भारी नुकसान होता है। सुनवाई की पिछली तारीख पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह विरोध-प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी किए गए आदेशों को पेश करे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि सरकार के जवाब में पांच श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाएं, पत्रकार, वकील और जंतर-मंतर को ‘डीनोटिफाई’ (अधिसूचना रद्द) करने से जुड़े मामले शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि धारा 163 के तहत जारी आदेशों को अदालत के सामने अलग से पेश किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई के पक्ष में तर्क तो पेश कर दिए हैं, लेकिन संबंधित आदेश अभी तक रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया है। इस पर मेहता ने जवाब दिया कि पांचवें हलफनामे में यह जानकारी मौजूद है। गुरुस्वामी ने जोर देकर कहा कि याचिकाकर्ताओं को इस हलफनामे की एक प्रति दी जानी चाहिए।
व्यापारियों ने त्योहारी सीजन के दौरान प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाने की मांग की
दिल्ली में व्यापारी संघों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनों के कारण होने वाली बाधाओं पर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि इससे व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी विचार किया जाना चाहिए। रोहतगी ने अदालत से कहा वहां 50 लाख लोग रहते हैं। अब हमें किसी योजना के बारे में सोचना होगा। अब यह सिर्फ इधर-उधर जंतर-मंतर वाली बात नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में दुकानें बंद रहीं और दावा किया कि त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा अगर त्योहारी सीजन में बिक्री नहीं होती, तो हमारा कारोबार गिर जाता है।” उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह कोई “अलग तरह का समाधान” (आउट-ऑफ-द-बॉक्स सॉल्यूशन) निकाले। रोहतगी ने दलील दी कि इस मामले को केवल विरोध-प्रदर्शन के लिए एक तय जगह मिलने या न मिलने के विवाद के तौर पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि आसपास के इलाकों में काफी लोग रहते हैं और अपना कारोबार चलाते हैं। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने जवाब दिया कि जो लोग बंद का आह्वान कर रहे हैं, उन्हें इसके नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों को भी इस कानूनी कार्यवाही में पक्षकार बनाया गया है। रोहतगी ने कहा कि वह उन्हें भी इसमें शामिल कर लेंगे।

More From Author

Dehradun on alert for fire safety during Diwali; water tankers stationed at 41 locations.

दीपावली पर अग्नि सुरक्षा को लेकर देहरादून अलर्ट, 41 स्थानों पर पानी के टैंकर तैयार

Glenn Maxwell Retirement, Glenn Maxwell Retires From International Cricket, Glenn Maxwell News, Australia Cricket Maxwell

Glenn Maxwell Retires: ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा

LIVE देखने के लिए टैप करें