A plan has been prepared to improve air quality in Kashipur and Rishikesh, Uttarakhand; efforts will focus on three key areas to boost their rankings.

उत्तराखंड के काशीपुर-ऋषिकेश की हवा सुधारने का प्लान तैयार, रैंकिंग बढ़ाने के लिए 3 बिंदुओं पर होगा काम

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में काशीपुर और ऋषिकेश में वायु प्रदूषण कम करने पर चर्चा हुई। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पिछले साल के मुकाबले दोनों शहरों की रैंकिंग में गिरावट के बाद सुधार के लिए कार्ययोजना पर जोर दिया गया।

बता दें कि उत्तराखंड के काशीपुर और ऋषिकेश में वायु प्रदूषण कम करने एवं स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने के लिए अब नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे। पिछले साल के मुकाबले दोनों शहरों की रैंकिंग में गिरावट आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में इस पर चर्चा की गई।

मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में शहरों में प्रदूषण के प्रमुख कारणों को ध्यान में रखा गया। जिसके तहत एंड-टू-एंड पेवमेंट, ग्रीनिंग और ट्रैफिक कंजेशन कम करने के उपायों पर काम करने के निर्देश दिए गए।

सड़कों के किनारों पर धूल रोकने पर जोर:एंड-टू-एंड पेवमेंट के तहत सड़कों के किनारों और उन हिस्सों को पक्का करने पर ध्यान दिया जाएगा, जहां कच्ची जमीन होने के कारण वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ती है। सड़क के किनारे मिट्टी और खुले हिस्सों से उठने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक कारण बनती है।

ऐसे स्थानों पर उचित पेवमेंट होने से धूल के उड़ने में कमी आ सकती है। इसके साथ ही सड़कों की नियमित सफाई और निर्माण सामग्री से फैलने वाली धूल को नियंत्रित करने के प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे।

ग्रीनिंग से धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण:ग्रीनिंग के तहत सड़कों के किनारे, खुले स्थानों और उपलब्ध खाली जमीन पर पौधरोपण व हरित क्षेत्र विकसित करने पर जोर रहेगा। हरित पट्टियां विकसित होने से धूल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों का चयन और लगाए गए पौधों की देखभाल भी जरूरी होगी। शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने से पर्यावरण की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।

ट्रैफिक जाम कम करने के होंगे प्रयास:ट्रैफिक कंजेशन कम करने के लिए उन मार्गों और चौराहों पर ध्यान देना होगा, जहां वाहनों का दबाव अधिक रहता है। जाम में वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने और बार-बार रुकने-चलने से उत्सर्जन बढ़ सकता है।

ऐसे में यातायात प्रबंधन में सुधार, चौराहों पर वाहनों का बेहतर संचालन और जाम वाले स्थानों की पहचान जैसे उपायों से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि,

“काशीपुर और ऋषिकेश दोनों ही शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहे हैं। इसमें तीन बिंदुओं पर फोकस करते हुए काम किया जाएगा।”-पराग मधुकर धकाते, सदस्य सचिव, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तराखंड

रैंकिंग सुधारने के साथ प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस

मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में इन उपायों के जरिए काशीपुर और ऋषिकेश में वायु प्रदूषण कम करने पर जोर दिया गया। उद्देश्य केवल स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि शहरों की वायु गुणवत्ता बेहतर बनाना भी है।

इसके लिए संबंधित विभागों को निर्धारित कार्यों पर प्रभावी ढंग से काम करना होगा। हालांकि इन उपायों का वास्तविक असर उनके क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा। फिलहाल, दोनों शहरों की सेहत सुधारने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं।

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