Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में लगातार वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। दिल्ली का AQI 370 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। NCR के अन्य शहरों में हालात और भी खराब हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा का AQI 407, नोएडा का 397 और गाजियाबाद का AQI 395 दर्ज किया गया। इस AQI का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
उत्तर भारत के अन्य शहरों का AQI भी खराब
दिल्ली-NCR के अलावा उत्तर भारत के अन्य बड़े शहरों में भी प्रदूषण का स्तर इसी प्रकार खराब है। लखनऊ में AQI 346, मुंबई में 303 और चंडीगढ़ में 298 दर्ज किया गया। देहरादून में AQI 165 रहा, जो अन्य शहरों की तुलना में बेहतर है और ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है।
CAQM की नई रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी से नवंबर 2025 के बीच दिल्ली का औसत AQI पिछले आठ वर्षों में सबसे कम रहा। वही 2025 का औसत AQI 187 रहा, जो 2024 (201) और 2023 (190) की तुलना में बेहतर है। हालांकि रिपोर्ट ने स्वीकार किया कि वर्तमान वायु प्रदूषण स्तर तत्काल खतरा है और तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
AQI मॉनिटरिंग पर छिड़काव के आरोप
इस बीच दिल्ली सरकार पर कुछ स्टेशनों पर पानी का छिड़काव कर AQI को कृत्रिम रूप से बेहतर दिखाने के आरोप भी सामने आए हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता की मांग की है।
धूल और निर्माण गतिविधियां बनीं बड़ा कारण
सरकारी बैठकों में सामने आया कि दिल्ली-NCR में PM2.5 और PM10 प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत धूल है। NCR में रोजाना 8,000 टन निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा निकलता है, लेकिन इसकी प्रोसेसिंग क्षमता फ़िलहाल कम है। PMO ने बड़े शहरी और औद्योगिक मार्गों के पुनर्विकास के लिए समयबद्ध योजना बनाने को कहा है।
वाहन प्रदूषण से स्थिति और खराब
जांच में पाया गया कि NCR में चलने वाले कुल वाहनों का आधे से ज्यादा हिस्सा दिल्ली में है। इनमें से 37% वाहन पुराने BS-I से BS-III नॉर्म्स वाले हैं, जो ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। औद्योगिक यूनिट्स में भी 11,000 से ज्यादा ऐसी इकाइयां हैं जो प्रदूषण नियंत्रण मानकों पर खरी नहीं उतरतीं है।
नई स्टडी से और सख्त होंगे नियम
CPCB ने IITs और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर नई सोर्स-अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू कर दी है। इसमें 7-8 प्रमुख प्रदूषण स्रोतों का विश्लेषण किया जाएगा। इससे प्राप्त नए डेटा के बाद GRAP के नियमों को और कड़ा किया जा सकता है। 2018 की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, PM2.5 में 39% योगदान परिवहन, 18% सड़क धूल, 11% पावर प्लांट और 3% उद्योगों का था।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्तर पर सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने लोगों को N95 मास्क पहनने, सुबह-शाम की वॉक से बचने और घर में एयर प्यूरीफायर के उपयोग की सलाह दी है।
कांग्रेस ने दिल्ली सरकार पर साधा निशाना
प्रदूषण संकट पर कांग्रेस ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की हवा ‘धीमा जहर’ बन चुकी है। पार्टी ने इसे राष्ट्रीय समस्या बताया और सरकार से सांसदों की समिति बनाकर व्यापक समाधान निकालने की मांग की। कांग्रेस ने AAP और BJP पर आरोप लगाया कि मुफ्त योजनाओं पर अधिक खर्च के कारण बुनियादी सुविधाओं पर निवेश कम हो गया है।
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