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Mathura News: मुस्लिम समाज ने शादियों में डीजे और फिजूलखर्ची पर लगाया प्रतिबंध

Mathura News: नगर के मुस्लिम समाज ने शादियों में फिजूलखर्ची और सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए पंचायत में एक बड़ा कदम उठाया है। इस निर्णय के तहत अब किसी भी शादी में डीजे, बैंड, ढोल-ताशे और आतिशबाजी पर भी पाबंदी लगाई गई है। नियमों का उल्लंघन करने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और मौलाना भी निकाह पढ़ने से इनकार कर देंगे।

निकाह सिर्फ मस्जिद में होगा

पंचायत ने तय किया कि अब दूल्हे का निकाह मैरिज होम में नहीं, बल्कि मस्जिद में ही पढ़ा जाएगा। हालांकि बारात और दावत की व्यवस्था मैरिज होम, होटल या गेस्टहाउस में की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शादियों को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से गंभीर रखना है। दूल्हे के लिए सलामी उपहार की रस्म पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है। पंचायत ने कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले परिवारों को समाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ेगा।

सलामी उपहार और आतिशबाजी पर रोक

समाज ने यह भी तय किया कि शादियों में सलामी उपहार और आतिशबाजी जैसी फिजूलखर्ची पूरी तरह बंद रहेगी। इससे शादियों में होने वाले विवाद और झगड़े कम होंगे और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने में मदद मिलेगी। पंचायत के सदस्यों ने कहा कि इन कुरीतियों के कारण कई बार परिवारों में झगड़े होते रहे हैं और समाज का एकता प्रभावित होती रही है।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

पंचायत ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई परिवार नियमों को पहली बार तोड़ता है तो उसे समझाया जाएगा, लेकिन बार-बार नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और उनकी शादियों में समाज के लोग भाग नहीं लेंगे। नियमों का पालन न करने वाले मौलाना को भी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

सामाजिक एकता और सौहार्द का उद्देश्य

समाज के लोगों ने बताया कि शादियों में डीजे और फिजूलखर्ची के कारण कई बार झगड़े होते रहे हैं, जिससे एकता और सौहार्द प्रभावित होते रहे। पंचायत का यह फैसला इन समस्याओं को रोकने और समुदाय में भाईचारे को बनाए रखने के लिए लिया गया। पंचायत में समाज के तमाम वरिष्ठ लोग उपस्थित थे और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।

पंचायत में मौजूद लोग

पंचायत में मीनुद्दीन, लियाकत अली, हाजी साकिब, आस मौहम्मद, हाजी सादिक, मेहराज, वली मौहम्मद, जिब्रान हुसैन एडवोकेट, हाजी अजीज, सुलतान अहमद, इस्लाम ठेकेदार, इदरीश मेम्बर, रहीश कुरैशी और हाजी यासीन सहित कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। सभी ने इस निर्णय को समाज के लिए आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया।

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