Navaratri 2025: भारत में नवरात्रि का पर्व हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। यह नौ दिवसीय उत्सव माता दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का पर्व है।
2025 की नवरात्रि में आज दूसरा दिन है और पूरे देश में श्रद्धालु माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना में व्यस्त हैं। नवरात्रि का यह दिन विशेष रूप से संयम, तपस्या और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। उन्हें वह रूप माना जाता है जो अपने तप और संयम से सम्पूर्ण ब्रह्मांड में ज्ञान और शक्ति का संचार करती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा में एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल दिखाई जाती है, जो ज्ञान और तपस्या का प्रतीक है।
श्रद्धालु मानते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से मन में साहस, शक्ति और आत्मसंयम की वृद्धि होती है। इस दिन व्रती विशेष रूप से सात्विक भोजन का सेवन करते हैं और भक्ति और ध्यान में लीन रहते हैं। मंदिरों और घरों में मां ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा और आरती की जाती है।
देशभर में श्रद्धालुओं की भागीदारी
आज देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा-अर्चना में शामिल हुए। उत्तर भारत के मंदिरों में विशेष झांकियां और भव्य सजावट की गई हैं। गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में विशेष रूप से भव्य मांत्रिक संगीत और कीर्तन का आयोजन किया गया।
शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं ने अपने घरों में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष आयोजन किया। लोग अपने घरों और मंदिरों को फूल, दीप और रंग-बिरंगी सजावट से सजाते हैं।
कई स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा व्रत कथा और धार्मिक गीतों का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
पूजा विधि और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है उनकी प्रतिमा या तस्वीर का विधिपूर्वक स्नान और श्रृंगार करना। व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ़ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की तैयारी करते हैं।
पूजा स्थल पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाया जाता है, जिस पर मां की प्रतिमा स्थापित की जाती है।
पूजा में मुख्यतः धूप, दीप, नैवेद्य और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही व्रती जपमाला से माता का नाम जपते हैं और मंत्र “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” का उच्चारण करते हैं।
इस दिन विशेष रूप से सात्विक भोजन किया जाता है और मांस, शराब, अनाज, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से मानसिक शांति, ज्ञान की प्राप्ति और आत्मसंतोष की अनुभूति होती है। यह दिन साधना और तपस्या के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन का आध्यात्मिक संदेश
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप हमें संयम, सहनशीलता और आत्मनियंत्रण का संदेश देता है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि सच्ची शक्ति केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक ऊर्जा और आत्मसंयम में निहित है।
भक्तजन इस दिन ध्यान और भक्ति के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं।
विशेष रूप से युवा और विद्यार्थी इस दिन मां से बुद्धि, ज्ञान और अध्ययन में सफलता की प्रार्थना करते हैं।
व्यापारी और नौकरीपेशा वर्ग मां से आर्थिक और व्यवसायिक समृद्धि की कामना करता है। यह दिन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए आस्था और भक्ति का सशक्त माध्यम है।
समाज में नवरात्रि का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह त्योहार परिवार और समाज को एक साथ लाने का कार्य करता है। लोग मिल-जुलकर पूजा, भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों में डांडिया और गरबा नृत्य का आयोजन किया जाता है, जो न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि समाजिक एकता और सहयोग का प्रतीक भी है।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर रंग-बिरंगे डांडिया और गरबा करती हैं, जबकि पुरुष और बच्चे भी इस उत्सव में भाग लेते हैं।
धार्मिक स्थलों में विशेष तैयारी
देशभर के प्रमुख दुर्गा मंदिरों में नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। मंदिरों में सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के पूजा कर सकें।
विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिरों की सजावट, दीप प्रज्वलन, रंग-बिरंगे फूलों की सजावट और पंडाल का आकर्षक निर्माण भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव को और समृद्ध करता है।
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