Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका की एक अदालत ने मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया क्योंकि हसीना पिछले साल 5 अगस्त को अपनी सरकार गिरने के बाद से भारत में रह रही हैं। अदालत ने पहले उन्हें भगोड़ा घोषित किया था।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश (ICT-BD) ने कहा कि 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर हुई हिंसा और हत्याओं में हसीना की सहमति और आदेश शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस आंदोलन के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे। अदालत ने पाया कि हसीना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग करने, भड़काऊ बयान देने, और ढाका तथा आसपास के इलाकों में छात्रों की हत्या के लिए अभियान चलाने की अनुमति दी थी।
अदालत के तीन जजों के पैनल ने अपना फैसला छह हिस्सों और 400 पेज में पढ़ाया। अदालत ने हसीना को अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया। अदालत ने कहा कि उन्होंने घातक हथियारों और हेलीकॉप्टरों का उपयोग करने का आदेश भी दिया।
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इसके अलावा, ट्रिब्यूनल ने पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमान खान को 12 हत्याओं का दोषी मानते हुए मौत की सजा दी। वहीं, पूर्व IGP अब्दुल्ला अल-ममून को 5 साल की जेल की सजा सुनाई गई। अल-ममून सरकारी गवाह बन चुके हैं और अदालत में अपनी गवाही के दौरान कई खुलासे किए। अदालत ने हसीना और असदुज्जमान की संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया।
इस मामले की सुनवाई 28 कार्यदिवसों तक चली, जिसमें 54 गवाहों ने अपनी गवाही दी। अदालत ने पाया कि हसीना वरिष्ठ पद पर होने के नाते, घटनाओं की जिम्मेदारी लेने और आदेश देने की स्थिति में थीं।
सजा का ऐलान होते ही अदालत में मौजूद लोगों ने तालियों से स्वागत किया। हसीना और असदुज्जमान दोनों पिछले 15 महीने से भारत में रह रहे हैं। अदालत का यह फैसला बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है और इसके देश की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण पर असर पड़ने की संभावना है।
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