UP BJP President : देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश पर एक बार फिर सियासी निगाहें टिकी हुई हैं। इसकी वजह है भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चल रहा मंथन, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लगातार बैठकों और विचार-विमर्श के बाद आज औपचारिक रूप से नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होने की संभावना है। यह पद संगठन की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश न सिर्फ केंद्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति भी यहीं से तय होती है।

नामांकन प्रक्रिया और चुनाव का पूरा कार्यक्रम
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यूपी में बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा ही है।
बीजेपी के उत्तर प्रदेश यूनिट में नए अध्यक्ष की तलाश पिछले डेढ़ साल से चल रही थी। दिल्ली से लखनऊ तक लंबी चर्चाओं के बाद 13 दिसंबर (शनिवार) को नामांकन हुआ। दोपहर 2 से 3 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल करने का समय था और शाम 5 बजे तक नाम वापसी की जा सकती थी। इस दौरान राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े जैसे केंद्रीय पर्यवेक्षक मौजूद रहे। पंकज चौधरी ने लखनऊ स्थित बीजेपी कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया। किसी और ने पर्चा नहीं भरा, इसलिए उनका निर्विरोध चुनाव तय हो गया।
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14 दिसंबर (रविवार) यानि आज केंद्रीय चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल ने प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। अगर एक से ज्यादा नामांकन होते तो वोटिंग होती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नए अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के सभागार में की गई। पार्टी मुख्यालय से लेकर प्रमुख चौराहों तक सजावट की गई और भव्य स्वागत की तैयारी की गई।

पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर और पृष्ठभूमि
पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार सांसद चुने जा चुके हैं। वे कुर्मी जाति से हैं, जो ओबीसी कैटेगरी में आती है। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है। उनकी नियुक्ति से पार्टी को ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिलेगी, जो हाल के लोकसभा चुनाव में कमजोर पड़ा था। खासकर कुर्मी समाज, जो उत्तर प्रदेश में बड़ा वोटर ग्रुप है, को साधने की रणनीति साफ नजर आ रही है।
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पंकज चौधरी का जन्म और शुरुआती जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई, लेकिन वे एक अनुभवी नेता हैं। महाराजगंज गोरखपुर के नजदीक है, जहां से योगी आदित्यनाथ आते हैं। इसलिए राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फैसला योगी जी के प्रभाव से हुआ। अमित शाह की बजाय योगी की चली, ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है। यह नियुक्ति राज्य में बीजेपी की आंतरिक राजनीति को भी प्रभावित करेगी।
राजनीतिक महत्व और आगे की रणनीति
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला संगठन को मजबूत करेगा और आगामी चुनावों में फायदा देगा। लखनऊ से दिल्ली तक सभी की नजरें इस पर टिकी हैं। पंकज चौधरी को मोदी-शाह का भरोसेमंद कहा जाता है, इसलिए उनकी लीडरशिप में बीजेपी उत्तर प्रदेश में और मजबूत हो सकती है। कुल मिलाकर, यह नियुक्ति राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।

