Yumnam Khemchand Singh

कौन हैं Yumnam Khemchand Singh? जो बनेंगे मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री

Yumnam Khemchand Singh: मणिपुर की सियासत में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पिछले काफी समय से मणिपुर जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। अब इस सीमावर्ती राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान ने राज्य के बिगड़ते हालात को संभालने और सामाजिक संतुलन साधने के लिए एक बहुत बड़ा दांव खेला है। कल नई दिल्ली में विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सामने आया कि मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह बनने जा रहे हैं। पार्टी का यह फैसला केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य में शांति बहाली की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कौन हैं वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह?

वाई. खेमचंद सिंह मणिपुर बीजेपी के एक प्रमुख नेता हैं। वह सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं और उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ राज्य की राजधानी इंफाल में है। वह 2017 और 2022 में विधानसभा चुनावों में विजयी रहे हैं।

2017 में खेमचंद सिंह को मणिपुर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया था, जहां उन्होंने पांच साल तक इस पद पर काम किया था। उनका कार्यकाल राज्य में संवेदनशील राजनीतिक परिस्थितियों में विधानसभा की कार्यवाही को ठीक से चलाने के लिए जाना जाता है। इसके बाद, 2022 में उन्हें नगर प्रशासन, आवास एवं शहरी विकास, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया।

राज्य में 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू होने तक खेमचंद सिंह कैबिनेट मंत्री रहे और शहरी प्रशासन सुधार, ग्रामीण विकास और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

खेमचंद सिंह और दो समुदायों के बीच विश्वास बहाली

खेमचंद सिंह की उम्र 62 साल है और वह मैतेई समुदाय से आते हैं। हाल ही में उन्होंने कुकी बहुल इलाकों का दौरा किया था और शांति की अपील की थी। उनकी स्वीकार्यता कुकी समुदाय में भी देखी जाती है। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा के बाद विश्वास बहाली की प्रक्रिया अब बेहद जरूरी हो गई है।

मणिपुर में जातीय हिंसा

3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें अब तक 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 60 हजार से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इस संघर्ष के बाद फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था।

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