उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वाद-विवाद जारी
उत्तराखंड में होने वाले आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है। दरअसल, मंगलवार 22 जुलाई को नैनीताल हाईकोर्ट में न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की। चूंकि डिग्री कालेज के प्राध्यापक डा. धीरज कुमार चंदोला सहित सात ने याचिका दायर कर कहा कि डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापक प्रथम श्रेणी के कर्मचारी है, वहीं चुनाव में पीठासीन अधिकारी द्वितीय श्रेणी का कर्मचारी होता है, लिहाजा इस कारण डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों की ड्यूटी चुनाव में नहीं लगाई जा सकती। वहीं इससे पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट ने भी राज्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से डिग्री कालेज के प्राध्यापकों की चुनाव में पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्ति करते समय गरिमा का ख्याल रखने की अपेक्षा की थी। नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से कहा गया था कि डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापक प्रथम श्रेणी के कर्मचारी हैं, लिहाजा कहीं ऐसा न हो कि इन्हें द्वितीय श्रेणी के अधीन काम दे दिया जाए।
चुनाव में प्रोफेसरों की ड्यूटी पर नैनीनात हाईकोर्ट का फैसला
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में डिग्री कॉलेजों के प्राध्यापकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त के मामले पर राहत देते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करी। नैनीताल हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई करते हुए पूर्व के आदेश के क्रम में उनकी याचिका को निस्तारित कर दिया है।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

