उत्तराखंड नगर निगम ने मां मनसा देवी रोपवे संचालन के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की, पांच वर्ष अनुभव अनिवार्य

उत्तराखंड नगर निगम द्वारा रोपवे संचालन के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू

 

उत्तराखंड नगर निगम प्रशासन ने मां मनसा देवी रोपवे के संचालन एवं अनुरक्षण के लिए टेंडर प्रक्रिया पुनः प्रारंभ कर दी है। नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि इच्छुक कंपनियां 29 सितंबर तक ई-निविदा जमा कर सकती हैं, जबकि तकनीकी बिड की तिथि 30 सितंबर नियत की गई है। टेंडर में भाग लेने के लिए कम से कम पांच वर्षों का रोपवे संचालन का अनुभव आवश्यक है। वर्तमान में 1974 से उषा ब्रेको कंपनी रोपवे सेवा प्रदान कर रही है, जिसका पिछला अनुबंध 2021 में समाप्त हो गया था। हालांकि, नगर निगम बोर्ड ने बिना उचित नियमों के पालन के लीज अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था, जिस पर पार्षदों के बीच विवाद हुआ और मामला शासन स्तर तक पहुंचा। शासन ने नगर निगम से जांच रिपोर्ट मांगी, जिसमें यह पाया गया कि नियमों का पालन नहीं किया गया। इस पर नगर निगम ने निर्णय लिया कि आगामी दो वर्षों तक मनसा देवी रोपवे को नियमों के अनुसार संचालन किया जाएगा, लेकिन इसके पहले आईआईटी रुड़की से तकनीकी परीक्षण जरूरी है। रोपवे 40 वर्षों से अधिक पुराना होने के कारण यह परीक्षण आवश्यक है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

न्यूनतम 5 वर्ष अनुभव वाली कंपनियों को ही मिलेगा मौका

 

 

मां मनसा देवी रोपवे का संचालन हाल ही में विवादों के बीच हुआ है, जहां टेंडर प्रक्रिया में अनुभवहीन कंपनियों को शामिल करने से विवाद खड़ा हुआ था। पहले टेंडर में न्यूनतम दो वर्ष अनुभव वाली फर्में हिस्सा ले सकती थीं, लेकिन हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद नगर निगम ने टेंडर वापस ले लिया। शासन ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक समिति बनाई, जिसने सुझाव दिया कि अब रोपवे संचालन और अनुरक्षण के लिए कम से कम पाँच वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया जाए। इसके बाद नगर निगम ने उषा ब्रेको कंपनी को लगभग ढाई साल के लिए संचालन क़रार दिया था, जो इस क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी है। इस प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी पर भी सवाल उठे हैं।

 

अनुभवहीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई, नगर निगम ने टेंडर वापस लिया

 

 

 

उत्तराखंड नगर निगम में मां मनसा देवी रोपवे टेंडर प्रक्रिया विवादित रही, जिसमें सड़क और भवन निर्माण फर्मों ने भी टेंडर जमा कर दिया था, जबकि उनका रोपवे संचालन से कोई लेना-देना नहीं था। यह बात तब सामने आई जब तकनीकी बिड खुली, जिससे नगर निगम बोर्ड और जनता में हड़कंप मच गया। नगर निगम बोर्ड गठन के बाद भी तत्कालीन नगर आयुक्त ने संबंधित प्रस्ताव को बोर्ड तक नहीं पहुंचाया और केवल महापौर की मंजूरी से कार्यवाही को आगे बढ़ाया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे। क्षेत्रीय विशेषज्ञ कंपनी उषा ब्रेको ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी, परंतु नगर निगम ने कोर्ट के मुकाबले टेंडर वापस लेने का फैसला कर विवाद को टाला। यह कदम अनुभवहीन कंपनियों के खिलाफ सख्त रवैया दिखाता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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