जिन्हें सौंपी रक्षा की कमान, वही कर रहे उत्तराखंड का नुकसान….उत्तराखंड वन विभाग का नया कारनामा

सर्वविदित है कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है जिसमें 45.44 कुल वन क्षेत्र है जिसका रख-रखाव और सुरक्षा का जिम्मा राज्य सरकार ने उत्तराखंड वन विभाग को वर्षों से सौंप रखा है। लेकिन कुछ वर्षों से उत्तराखंड के वनों की हानि में तेजी आई है जो कि एक चिंता का विषय है। दरअसल वन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष जनवरी से जंगलो में आग लगाई जाती है जो कि फायर सीजन से पहले लगाई जाती है जिसे कंट्रोल बर्निंग कहा जाता है, ताकि जंगलों को पतझड़ और गर्मी के सीजन में वनाग्नि से बचाया जा सके लेकिन पिछले 2-3 सालों की वन विभाग की रिपोर्ट में पड़े आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो वनाग्नि से ज्यादा कंट्रोल बर्निंग ने उत्तराखंड के वनों को नुकसान पंहुचाया है जो कि वनाग्नि की अपेक्षा 20% अधिक है। कंट्रोल बर्निंग एक अंग्रेजी तकनीक है जो पहले के समय से अब तक चली आ रही है लेकिन आज के समय में यह तकनीक पर्यावरण और वन दोनों के लिए कैंसर जैसी भयावाह साबित हो रही है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल वनाग्नि की जितनी भी घटनाएं हुईं, उनमें करीब चार फीसदी कंट्रोल बर्निंग के लिए लगाई गई थी। अब विभाग में ही इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसके अलावा पर्यावरण प्रेमी भी इसे बंद करने की सिफारिश कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी अनिल कक्कड़ ने बताया कि यह एक बेहद पुराना तरीका है, जो कि फायदा कम और नुकसान ज्यादा कर रहा है। पर्यावरण प्रेमी अनिल कक्कड़ ने कहा कि इस मामले को लेकर वे जल्द ही एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने की तैयारी में हैं।

 

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